
Delhi Excise Policy Case: दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका लगा है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दिल्ली आबकारी नीति मामले में केजरीवाल पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। ईडी ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल ने 100करोड़ रुपये की रिश्वत ली और निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया। हालांकि, आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा है कि दो साल की लंबी जांच में कोई भी पैसा बरामद नहीं हुआ है।
ईडी का आरोप है कि केजरीवाल ने 'साउथ ग्रुप' के साथ मिलकर 100करोड़ रुपये की रिश्वत ली। इसके तहत शराब नीति को कस्टम मेड बनाकर निजी संस्थाओं को लाभ पहुंचाया गया। साउथ ग्रुप को शराब दुकानों में हिस्सेदारी भी दी गई। ईडी ने यह भी कहा कि केजरीवाल ने इस घोटाले से 45करोड़ रुपये गोवा चुनावों में खर्च किए। उनका कहना है कि केजरीवाल, जो आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं, चुनावी खर्चों के लिए जिम्मेदार थे।
जांच में कोई ठोस सबूत नहीं -AAP
आम आदमी पार्टी ने ईडी के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि इस मामले की दो साल से जांच हो रही है, जिसमें 500से अधिक लोगों को परेशान किया गया है। 50,000पन्नों के दस्तावेज और 250से अधिक छापे मारे गए, लेकिन अब तक एक भी पैसा बरामद नहीं हुआ। AAP का आरोप है कि बीजेपी का उद्देश्य केवल अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी को परेशान करना है।
केजरीवाल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मिली थी जमानत
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि केजरीवाल ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप छुपाने के लिए हवाला ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल किया। बता दें कि, 2022में सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद, केजरीवाल को मार्च 2024में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी।
यह मामला दिल्ली की राजनीति में नई हलचल मचा सकता है, और आने वाले विधानसभा चुनावों पर इसका असर पड़ सकता है।
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