Bangladesh Violence:बांग्लादेश में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर गारमेंट वर्कर्स का प्रदर्शन हिंसक हो गया है। राजधानी ढाका और गाजीपुर में हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान कई जगह तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं, जबकि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई। हालात को नियंत्रित करने के लिए औद्योगिक इलाकों में भारी संख्या में पुलिस और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के जवानों को तैनात किया गया है।
प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों की प्रमुख मांग है कि उनका न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका किया जाए। यानी वेतन में करीब 140 फीसदी की बढ़ोतरी की मांग की जा रही है। श्रमिकों का कहना है कि महंगाई के कारण खाने-पीने की चीजों, मकान किराए, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मौजूदा वेतन में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
सरकारी कर्मचारियों के नए वेतनमान के बाद तेज हुआ विरोध
दरअसल, सरकारी कर्मचारियों के लिए नए वेतनमान की घोषणा के बाद गारमेंट वर्कर्स ने भी अपने वेतन में बड़ी बढ़ोतरी की मांग तेज कर दी है। इस विवाद को सुलझाने के लिए बांग्लादेश सरकार ने छह सदस्यीय वेतन बोर्ड का गठन किया है। हालांकि, इसके बावजूद श्रमिकों का विरोध जारी है और प्रदर्शन थमने के संकेत नहीं मिल रहे हैं।
कई कपड़ा फैक्ट्रियों में कामकाज प्रभावित
ढाका और गाजीपुर के कई औद्योगिक इलाकों में तनाव बना हुआ है। हिंसक प्रदर्शनों के चलते कई कपड़ा फैक्ट्रियों में कामकाज प्रभावित हुआ है। इससे कपड़ा उत्पादन और निर्यात पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में गारमेंट उद्योग की अहम भूमिका है। यह उद्योग करीब 40 लाख लोगों को रोजगार देता है और देश के कुल निर्यात में 80 फीसदी से अधिक योगदान करता है। ऐसे में श्रमिकों का प्रदर्शन लंबे समय तक जारी रहने पर कपड़ा उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय निर्यात ऑर्डर और रोजगार प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा यह स्थिति बांग्लादेश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी चुनौती बन सकती है।
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