Gurugram IVF Case: हरियाणा के गुरुग्राम से सामने आए एक मामले ने IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक दंपति का दावा है कि IVF के जरिए जन्मीं उनकी जुड़वां बच्चियों का DNA टेस्ट कराने पर पता चला कि बच्चियां उनसे जैविक रूप से संबंधित नहीं हैं। परिवार अब प्रशासन और संबंधित IVF सेंटर से जवाब मांग रहा है। राहुल राठौर और उनकी पत्नी ने बताया कि उन्होंने डॉक्टर की सलाह पर पिछले साल गुरुग्राम के एक प्रसिद्ध IVF सेंटर में इलाज शुरू कराया था। सभी मेडिकल प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 14 मार्च को भ्रूण महिला के गर्भ में ट्रांसफर किए गए। इस वर्ष जनवरी में महिला ने जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। शुरुआत में परिवार में खुशी का माहौल था।
दंपति को हुआ संदेह
कुछ समय बाद दंपति को छोटी बच्ची के चेहरे और शारीरिक बनावट को लेकर संदेह हुआ। उनका कहना है कि बच्ची के नैन-नक्श परिवार से मेल नहीं खाते थे और वह पूर्वोत्तर भारत के लोगों जैसी दिखती थी। संदेह बढ़ने पर दोनों बच्चियों का DNA टेस्ट कराया गया। रिपोर्ट आने पर परिवार को बड़ा झटका लगा। दंपति के अनुसार, टेस्ट में दोनों बच्चियों का DNA माता-पिता से मेल नहीं खाया। मामले की जानकारी मिलने के बाद राहुल ने पुलिस और प्रशासन से शिकायत की। उनका आरोप है कि शुरुआती तीन महीनों तक पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। बाद में अदालत के हस्तक्षेप के बाद 31 मार्च को FIR दर्ज की गई। हालांकि अगले दिन जांच पर रोक लग गई।
अदालत पहुंचे दंपति
5 जून को अदालत ने पुलिस को IVF सेंटर से रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेज जब्त करने का आदेश दिया। राहुल का कहना है कि अब तक सभी दस्तावेज जब्त नहीं किए गए हैं, लेकिन पुलिस का रवैया पहले से बेहतर हुआ है। इस घटना से मां गहरे सदमे में है। उन्होंने कहा कि यह उनकी तीसरी सिजेरियन डिलीवरी थी और शारीरिक दर्द के बावजूद उन्हें पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाने पड़े। दंपति ने प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उनके असली बच्चों का पता लगाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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