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मध्य प्रदेश में 12 दिनों में 5 पुलिसकर्मियों की आत्महत्या, काम का बोझ या मानसिक तनाव क्या है वजह?

मध्य प्रदेश में 12 दिनों में 5 पुलिसकर्मियों की आत्महत्या, काम का बोझ या मानसिक तनाव क्या है वजह?

MP Suicide Cases: मध्य प्रदेश में लगातार सामने आ रही पुलिसकर्मियों की आत्महत्या की घटनाओं ने पुलिस विभाग और सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 12 दिनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पांच पुलिसकर्मियों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले सामने आए हैं। ताजा घटना ग्वालियर जिले के डबरा शहर की है, जहां एक आरक्षक ने अपने सरकारी आवास में फांसी लगाकर जान दे दी। जानकारी के अनुसार, मुरैना जिले के पोरसा निवासी आरक्षक राघवेंद्र तोमर पिछले करीब एक साल से डबरा सिटी थाने में तैनात थे। शुक्रवार रात करीब 9 बजे उन्होंने अपने सरकारी आवास में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।

पत्नी को किया था वीडियो कॉल 

बताया जा रहा है कि इस कदम को उठाने से पहले उन्होंने अपनी पत्नी को वीडियो कॉल किया था। परिवार के लोगों के मुताबिक, उन्होंने पत्नी को आखिरी बार ‘बाय-बाय’ कहा और फिर कॉल काट दी। कुछ समय बाद जब उनके भाई मोनू तोमर ने कई बार फोन किया और कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने थाने में पदस्थ आरक्षक मिंटू परिहार को सूचना दी। जब मिंटू परिहार सरकारी आवास पहुंचे तो राघवेंद्र फंदे से लटके मिले। सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। राघवेंद्र तोमर को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी और उनके दो छोटे बच्चे हैं। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

पहले भी कई पुलिसकर्मी आत्महत्या कर चुके 

इससे पहले भी प्रदेश में कई पुलिसकर्मी आत्महत्या कर चुके हैं। 8 जून को मंडला जिले में आरक्षक सुनील सरयाम ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। जांच में सामने आया कि वह कथित ब्लैकमेलिंग से परेशान थे। 9 जून को गुना में महिला आरक्षक निशा शर्मा ने पुलिस क्वार्टर में आत्महत्या कर ली थी। वहीं 3 जून को छिंदवाड़ा में महिला प्रधान आरक्षक दीपा नेगी का शव जली हुई हालत में मिला था। बताया गया कि वह लंबे समय से मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रही थीं। 31 मई को उमरिया में सब-इंस्पेक्टर विजय सिंह कोल ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी।

लगातार हो रही इन घटनाओं ने पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य, कार्य के बढ़ते दबाव और तनाव प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस विभाग में नियमित काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। 

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