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Chaiti Chhath Puja 2026: आज से चैती छठ महापर्व का शुभारंभ, जानें पूजा विधि और व्रत के नियम

Chaiti Chhath Puja 2026: आज से चैती छठ महापर्व का शुभारंभ, जानें पूजा विधि और व्रत के नियम

Chhath Puja 2026: हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और कठिन व्रतों में से एक चैती छठ (Chaiti Chhath) आज रविवार, 22मार्च 2026से शुरू हो गया है। यह महापर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है, जो मुख्य रूप से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली यह छठ कार्तिकी छठ से अलग होती है और इसे वसंत ऋतु में सूर्य की उपासना के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। पर्व 25मार्च 2026 (बुधवार) तक चलेगा, जिसमें चार दिनों के सख्त नियमों और अनुष्ठानों का पालन किया जाता है।

चैती छठ 2026का चार दिवसीय कैलेंडर

दिन 1: नहाय-खाय – 22मार्च 2026 (रविवार) नहाय-खाय से छठ पर्व की शुरुआत होती है। व्रतियां सुबह स्नान कर पवित्र जल (नदी, तालाब या घर पर) से शुद्धिकरण करती हैं। इसके बाद सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज-नमक के) जैसे कद्दू-भात, चने की दाल और चावल ग्रहण किया जाता है। यह दिन शरीर और मन की शुद्धि के लिए होता है।

दिन 2: खरना – 23मार्च 2026 (सोमवार)

इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक निराहार-निरजला व्रत (बिना पानी-भोजन) रखा जाता है। शाम को सूर्यास्त के बाद खीर, फल, गुड़ और रोटी से व्रत खोला जाता है। यह 36घंटे के कठिन व्रत की शुरुआत मानी जाती है।

दिन 3: संध्या अर्घ्य – 24मार्च 2026 (मंगलवार)

मुख्य दिन, जहां व्रती नदी या तालाब में कमर तक पानी में खड़े होकर संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त के समय अर्घ्य) देते हैं। सूप (बांस की टोकरी) में ठेकुआ, फल, नारियल, गुड़, चावल की खीर आदि प्रसाद रखकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। यह आस्था और समर्पण का प्रतीक है।

दिन 4: उषा अर्घ्य और पारण – 25मार्च 2026 (बुधवार)

अंतिम दिन भोर में सूर्योदय के समय उषा अर्घ्य (सूर्योदय अर्घ्य) दिया जाता है। व्रती फिर पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इसके बाद व्रत पूरा होता है और पारण (व्रत खोलना) किया जाता है।

पूजा विधि और खास नियम

1. शुद्धता:पूरे चार दिनों में व्रती सादे, साफ कपड़े (लाल या पीले) पहनते हैं। घर और पूजा स्थल की सफाई अनिवार्य। कोई भी नकारात्मक विचार या क्रोध से दूर रहें।

2. 36घंटे निरजला व्रत:खरना के बाद से उषा अर्घ्य तक बिना पानी-भोजन के व्रत। यह स्वास्थ्य और इच्छाशक्ति की परीक्षा मानी जाती है।

3. प्रसाद:ठेकुआ (गेहूं के आटे से बने गुड़-तेल में तले), फल (केला, नारियल, सेब), गुड़, चावल की खीर, लौकी आदि। सब कुछ बांस की दौनी या सूप में रखा जाता है।

4. अर्घ्य:सूर्य को जल, दूध, शहद आदि से अर्घ्य। हाथ जोड़कर "ॐ सूर्याय नमः" मंत्र जपते हुए।

5. नियम:मांसाहार, शराब, झूठ, क्रोध से परहेज। महिलाएं मुख्य व्रती होती हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह से व्रत रखना चाहिए।

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