
Chaiti Chhath Sandhya Arghya Timing: चैत्र मास की छठी तिथि पर मनाए जाने वाले लोक आस्था के महापर्व चैती छठ 2026का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण दिन आज 24मार्च (मंगलवार) है। व्रती आज डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य अर्पित करेंगे। इस दिन सूर्य देव और छठी मैया की आराधना से स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और संतान सुख की कामना की जाती है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत पूरे पूर्वी भारत में नदियों, तालाबों और घाटों पर भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है।
संध्या अर्घ्य का शुभ समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, आज संध्या अर्घ्य का समय सूर्यास्त के साथ जुड़ा है। व्रती सूर्यास्त से पहले घाट पर पहुंचकर जल में खड़े होकर अर्घ्य देंगे। अर्घ्य देने का मुख्य मुहूर्त सूर्यास्त के 10-15मिनट पहले से लेकर डूबने तक माना जाता है। कल 25मार्च को चौथे दिन उषा अर्घ्य सूर्योदय के समय (सुबह करीब 5:47-6:20बजे) दिया जाएगा।
संध्या अर्घ्य के पूजा-विधि
चैती छठ के तीसरे दिन 36घंटे के निर्जला व्रत का कठोर पालन जारी रहता है। पूजा की कुछ अहम बातें:
1. शुद्धता का संकल्प:व्रती पूरे दिन सात्विक रहें। कोई जूता-चप्पल घाट पर न पहनें, न ही दूसरों को छुएं। घर और घाट दोनों जगह साफ-सुथरा रखें।
2. अर्घ्य सामग्री:बांस के सूप में ठेकुआ, केला, नारियल, गन्ना, सेब, संतरा, चावल के लड्डू और फूल रखकर अर्घ्य दें। दूध, जल और गंगाजल से सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं।
3. विधि:घाट पर पहुंचकर पहले छठी मैया को दंडवत प्रणाम करें। फिर कमर तक पानी में खड़े होकर दोनों हाथ ऊपर उठाकर तीन बार अर्घ्य दें। इस दौरान ‘छठी मैया के गीत’ गाएं। अर्घ्य देते समय सूर्य की ओर मुंह करके खड़े रहें।
4. अर्घ्य के बाद पीठ पीछे किए बिना घर लौटें। प्रसाद छूकर न लाएं, केवल व्रती ही ग्रहण करेंगे। कोई भी व्यक्ति व्रती को छू न सके।
5. भोजन संबंधी नियम:खरना के बाद से नमक, चावल, दाल, प्याज-लहसुन पूरी तरह वर्जित। ठेकुआ गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बनाया जाता है।
चैती छठ का महत्व
यह पर्व सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति और सूर्य की ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम है। 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शरीर और मन दोनों को शुद्ध करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी सूर्य किरणें विटामिन-डी बढ़ाती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करती हैं।
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