Succes Story:राजस्थान के बाड़मेर से सुनहरी खबर सामने आई है। यहां की दीपू तंवर अपनी सफसला से गांव का नाम रोशन किया है। बाड़मेर की रहने वाली दीपू कंवर ने अपने मेहनत और परिश्रम के बल न्यायिक सेवा में चयन हुई हैं।
यह सफलता शादी के सात साल बाद आई लेकिन खास बात यह है कि उनकी शादी ने उनके सपनों को रोका नहीं बल्कि मजबूत किया। दीपू कंवर बचपन से पढ़ाई, खेल-कूद में काफी अच्छी थी। उन्होंने बीकॉम किया।
उन्होंने बताया कि जब उनकी सगाई हुई तो तब वह बीकॉम करना चाहती थीं। उनके पति लोकेंद्र सिंह भी एलएलबी की पढ़ाई कर रहे थे। उनके पति ने उन्हें एलएलबी करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने केपी शाह लॉ कॉलेज जामनगर में एडमिशन लिया और कानून की पढ़ाई शुरू की।
ससुरालवालों ने दिया साथ
दीपू की सफलता के पीछे उनके ससुराल का बड़ा योगदान रहा। उनके ससुर थान सिंह का एक ही मानना था कि पढ़ाई सबसे पहले है। उनकी सास समद कंवर ने भी हर वक्त उनका साथ दिया। दीपू ने कहा कि जब भी वह घर के कामों में हाथ बंटाने की कोशिश करती थीं, तो उनके सास-ससुर उन्हें पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए कहते थे। इतना ही नहीं, उनके लिए घर में अलग कमरा बनाया गया, जो किसी हॉस्टल जैसा माहौल था।
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तीसरी बार में मिली सफलता
परिवार ने साथ दिया तो न्यायधीश बनने की राह में रुकावटें भी नहीं आई। एलएलबी करने के बाद उन्होंने जामनगर में ही कोर्ट में प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया था। साल 2022 में पहली बार गुजरात न्यायिक सेवा परीक्षा दी। दो राउंड क्वालीफाई करने के बाद इंटरव्यू में रह गई। इसके बाद 2023 में भी निराशा हाथ लगी। हालांकि, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी जारी रखी। आखिरकार 2025 में उनको सफलता मिली। वह गुजरात स्टेट ज्यूजिशियल सर्विस परीक्षा पास कर ली और 79वीं रैंक हासिल करके जज बन गई।