Uttar Pradesh News: कहने को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभी छह महीने दूर है लेकिन सियासी पारी हाई है। भाजपा से लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस तक चुनावी मूड में हैं। भाजपा सत्ता की हैट्रिक लगाने मैदान में उतेरगी। वहीं, समाजवादी पार्टी भी 10 साल से सत्ता के सूखे को खत्म करना चाहती है।
चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी का नया रंग-रूप भी देखने को मिल रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव लाल टोपी के साथ नीला गमछा धारण किए नजर आए। अब सपा ने छात्र सभा के नेताओं के लिए नया ड्रेस कोड तय किया है, जो नील रंग का होगा।
सपा का नया ड्रेस कोड
अखिलेश यादव ने सपा छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए नीली शर्ट और नीली पैंट या फिर नीली टी-शर्ट और नीली जींस अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, सपा नेता आमतौर पर सफेज कुर्ता-पायजामा, लाल टोपी और लाल गमछा पहने नजर आते हैं। जबकि नीला रंगा आमतौ र पर बसपा का प्रतीक माना जाता है। बताया जा रहा है कि दलित वोटर और युवा वोटर को साधने के लिए सपा ने पार्टी की छात्र सभा ड्रेस कोड में बदलाव किया है। दरअसल, सपा दलित और युवाओं को यह दर्शाना चाहती है कि उनकी पहचान को सम्मान दिया जा रहा है।
राजनीति में नीले रंग का महत्व
राजनीति में नीले रंग का महत्व काफी ज्यादा है। नील रंग के सहारे मायावती की बसपा ने कभी सत्ता हासिल की थी। नीला रंग बसपा का पारंपरिक रंग हुआ करता था। नीला रंगा दलित राजनीति और भीमराव आंबेडकर की विचारधार का प्रतीक माना जाता है। जबकि समाजवादी पार्टी की पहचान परंपरागत रूप से लाल और हरे रंग से जुड़ी रही है। अब 2027 के विधानसभा से पहले बसपा का रंग सपा पर चढ़ना शुरू हुआ है। सपा लोहिया और जेपी की विचारधारा के अलावा आंबेडकर और कांशीराम के विचारों को भी अपनाने की बात करती है।
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