SC on Vande Mataram Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने आज 22 सितंबर 2026 मंगलवार को सार्वजनिक सभाओं में वंदे मातरम के सभी छह श्लोकों के गायन को अनिवार्य बनाने वाले आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए भारत के सॉलिसिटर जनरल (एसजीआई) तुषार मेहता को याचिका पर लिखित जवाब दाखिल करने और दो सप्ताह के भीतर केंद्र का जवाब देने का निर्देश दिया।
क्या है पूरा मामला?
बता दें, यह याचिका गायक टीएम कृष्णा ने दायर की है, जिन्होंने सार्वजनिक सभाओं में वंदे मातरम के गायन पर केंद्र के आदेश को चुनौती दी है। याचिका में सभी छह श्लोकों के गायन की अनिवार्यता और नए कानून का पालन न करने पर होने वाले दंडात्मक परिणामों पर सवाल उठाया गया है। कृष्णा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एस मुरलीधर ने कहा कि संशोधित कानून एक दंडात्मक कानून है और इसलिए आपराधिक परिणामों को आकर्षित करने वाले आचरण को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए और इसे अस्पष्ट नहीं छोड़ा जाना चाहिए। इन दलीलों के बाद मुरलीधर और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बीच तीखी बहस छिड़ गई, जब मेहता ने संवैधानिक निर्णय लेने संबंधी मुरलीधर की दलीलों का जवाब देते हुए 'नक्सली' शब्द का इस्तेमाल किया।
मुरलीधर ने इस शब्द पर कड़ी आपत्ति जताई और सॉलिसिटर जनरल से इसे वापस लेने को कहा। उन्होंने कहा 'आपने अभी जो शब्द इस्तेमाल किया है, उसे वापस लें। यह लाइव प्रसारित हो रहा है... मैं इस पर कड़ी आपत्ति जताता हूं।' मेहता ने टिप्पणी वापस लेने से इनकार कर दिया और फिर से वही शब्द दोहराया। उन्होंने कहा 'मैंने कहा कि यह संवैधानिक तरीका है, न कि नक्सली जो चाहते हैं। और मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है।' मेहता द्वारा शब्द दोहराने पर मुरलीधर ने फिर से आपत्ति जताई। ओडिशा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा 'वह इसे फिर से दोहरा रहे हैं। मैं अब अपना कड़ा विरोध दर्ज कराने जा रहा हूं... सोचना नक्सली होना नहीं है।
Also read: चाहिए बिना डेटा वाला रिचार्ज...सिर्फ कॉल-SMS वाला सस्ता प्लान लाएंगी कंपनियां; TRAI का बड़ा फैसला
कोर्ट ने क्या कहा?
इस बहस के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने हस्तक्षेप किया और व्यक्तियों को प्राप्त संवैधानिक अधिकारों पर जोर दिया। न्यायाधीश ने कहा कि आतंकवादी होने के आरोपी व्यक्ति को भी संविधान के तहत अधिकार प्राप्त हैं। इसके बाद न्यायालय ने विवेक के आधार पर आपत्ति जताने वालों से संबंधित कानूनी मुद्दे और वंदे मातरम गाने से इनकार करने के परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया। न्यायमूर्ति बागची ने राष्ट्रीय गान के संबंध में विवेक के आधार पर राष्ट्रीय गान का पाठ करने से इनकार करने वालों के अधिकारों से संबंधित बिजोए इमैनुएल मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया।
उन्होंने कहा 'हम उम्मीद करते हैं कि बिजोए इमैनुएल मामले में इस न्यायालय द्वारा घोषित देश का कानून ही इस अधिनियम के अंतर्गत आएगा।' न्यायमूर्ति बागची ने आगे कहा कि विवेक के आधार पर राष्ट्रीय गान का पाठ करने से इनकार करने वाले व्यक्ति को केवल इसी कारण से आपराधिक अभियोजन का सामना नहीं करना चाहिए। न्यायालय ने कहा 'अर्थात, विवेक के आधार पर राष्ट्रीय गान का पाठ न करने वाले व्यक्ति के लिए आपराधिक अभियोजन का पात्र नहीं बनना पड़ेगा।'
केंद्र को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब देने को कहा
मुरलीधर ने तर्क दिया था कि संशोधित कानून की दंडात्मक प्रकृति के कारण न्यायालय के लिए यह जांच करना आवश्यक है कि वास्तव में किस आचरण पर अभियोजन चलाया जा सकता है। पीठ ने मेहता को लिखित प्रति लेने का निर्देश दिया और केंद्र को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। केंद्र का जवाब मिलने के बाद न्यायालय इस मामले पर विचार करेगा।