Delhi-Ambala rail route: ट्रेनों की बढ़ती भीड़, बेहतर कनेक्टिविटी और यात्रियों के सुविधाजनक सफर के लिए दिल्ली-पानीपत-अंबाला रेलमार्ग को फोरलेन करने की तैयारी की जा रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत हरियाणा के 21 गांवों की जमीनों को अधिग्रहित किया जाएगा, जिसका प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है। इन जमीनों के लिए तहसील के 5, सोनीपत के 10 और गन्नौर के 6 गांवों को चुना गया है।
बता दें, दिल्ली-अंबाला रूट उत्तर भारत का एक व्यस्त रेलमार्ग है। इसका रूट ज्यादातर डबल लाइन वाला है, लेकिन फोरलेन के तैयार होने से ट्रेनों की स्पीड बढ़ेगी और यात्रियों की भीड़ भी कम होगी। इससे यात्रियों का समय भी बचेगा और सफर भी बिना किसी परेशानी के पूरा हो जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने से दिल्ली, सोनीपत, पानीपत, करनाल और अंबाला के बीच की यात्रा और ज्यादा आसान हो जाएगी। इसके अलावा इस लेन से पंजाब, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर जाने वाले रेल यात्रियों की फायदा पहुंचेगा।
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कितना हो सकता है खर्चा?
दिल्ली से अंबाला तक के रेलमार्गों पर दो लेन पहले से ही मौजूद है। लेकिन अब दो और लेन जोड़ने के लिए कुल खर्चा करीब 5983 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में सब्जी मंडी से अंबाला कैंट के बीच दो लेनों का निर्नाण किया जाएगा। फिलहाल, दिल्ली-अंबाला रूट की लंबाई 197 किलोमीटर है, लेकिन फोर लाइन रेलवे ट्रैक बनने के बाद इसकी कुल लंबाई 420.41 किमी हो जाएगी। इसके अलावा 02 रेलवे ओवरब्रिज और 77 अंडर ब्रिज बनाएं जाएंगे।