
Highlevel Meeting On Manipur Violence: मणिपुर में हिंसा एक बार फिर भड़क गई है। आलम ये है कि विधायकों और मंत्रियों के घर को आग के हवाले कर दिया। अब हिंसक भीड़ को काबू करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने कमर कस ली है। बता दें कि सोमवार यानी 18 नवंबर को अमित शाह की अध्यक्षता में हाईलेवल मीटिंग होने वाली है। इस मीटिंग में सुरक्षा अधिकारी और एनएसए अजित डोभाल भी मौजूद रहेंगे। इसके अलाला गृह सचिव गोविंद मोहन और खुफिभा विभाग के निदेशक तपन डेका भी बैठक में शामिल होंगे।
5000 सुरक्षाकर्मी की फौज
केंद्र सरकार ने मणिपुर में 5,000 सुरक्षबलों के जवान को भेजने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय ने 20 अतिरिक्त सीएपीएफ कंपनियों, सीआरपीएफ से 15 और बीएसएफ से पांच को राज्य में भेजे जाएंगे। बताया जा रहा है कि 35 इकाइयां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) से ली जाएंगी, जबकि बाकी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से होंगी। फिलहाल, राज्य में कुल 218 सीएपीएफ कंपनियां मौजूद हैं।
मणिपुर में क्यों भड़की हिंसा?
बता दें कि, मणिपुर में राहत शिविर से लापता महिलाओं और बच्चों के शव मिलने के बाद हिंसा भड़क उठी है। भीड़ ने तीन मंत्रियों और मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के दामाद समेत छह विधायकों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की है। इसके अलावा दो चर्चों और तीन घरों को भी आग के हवाले कर दिया है।
बताया जा रहा है कि महिलाओं और बच्चों की उग्रवादियों ने हत्या की है। सोमवार यानी 18 नवंबर को सीआरपीएफ के साथ मुठभेड़ में 10 कुकी उग्रवादी मारे गए थे। उग्रवादियों के हमले के बाद से बुजुर्ग महिला, उसकी दो बेटियां और तीन नाबालिग बच्चे गायब हो गए थे।
एनपीपी ने वापस लिया समर्थन
इन हिंसक घटनाओं के बीच नेशनल पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने मणिपुर के अपने समकक्ष एन बीरेन सिंह पर निशाना साध दिया है। हालांकि, संगमा ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ने एनपीपी ने बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस लिया है। उन्होंने कहा कि अगर पड़ोसी राज्य में नेतृत्व परिवर्तन होता है तो पार्टी इस फैसले पर फिर से विचार करेगी।
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