
MEA on China new County: चीन ने एक बार फिर अपने विस्तारवादी रवैये का परिचय देते हुए लद्दाख के कुछ क्षेत्रों को अपना बताने का प्रयास किया है। इस पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन ने अपने होतान प्रांत में दो नए काउंटियों की घोषणा की है, जिनके अधिकार क्षेत्र में लद्दाख के हिस्से भी शामिल किए गए हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से कहा, "हमने चीन की इस घोषणा को देखा है। ये तथाकथित काउंटियां लद्दाख के उन क्षेत्रों पर दावा करती हैं जो भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। भारत ने इन दावों को कभी स्वीकार नहीं किया और न ही करेगा।"
लद्दाख पर चीन के अवैध कब्जे को कभी मान्यता नहीं मिलेगी
प्रवक्ता जायसवाल ने स्पष्ट किया कि चीन की इस कार्रवाई से भारत की संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, "भारत ने राजनयिक माध्यमों से चीन को यह संदेश दिया है कि लद्दाख में भारतीय क्षेत्र पर चीन का अवैध कब्जा अस्वीकार्य है। यह कदम हमारी संप्रभुता और रुख को प्रभावित नहीं करेगा। भारत अपने हितों की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।"
तिब्बत में दुनिया का सबसे बड़ा डैम बना रहा है चीन
चीन ने तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा डैम बनाने की योजना शुरू कर दी है। यह नदी भारत में ब्रह्मपुत्र और बांग्लादेश में जुमना के नाम से जानी जाती है। इस प्रोजेक्ट को लेकर भारत और बांग्लादेश के विशेषज्ञों ने पर्यावरण और पानी के प्रवाह को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि 25दिसंबर 2024को इस प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ द्वारा दी गई थी। प्रवक्ता जायसवाल ने कहा, "हमने चीन को विशेषज्ञ-स्तरीय और राजनयिक माध्यमों से अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। चीन से आग्रह किया गया है कि वह पारदर्शिता बनाए रखे और डाउनस्ट्रीम देशों के हितों का ध्यान रखे।"
भारत की रणनीति और चीन को कड़ा संदेश
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि चीन के इन कदमों से उसके अधिकारों और संप्रभुता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एलएसी पर तनाव के साथ-साथ ब्रह्मपुत्र नदी से जुड़े इस डैम प्रोजेक्ट पर भारत नजर बनाए हुए है और अपने हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगा।
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