Gold Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को तेजी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं के वायदा भाव बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। सुबह 11:43 बजे तक सोने में करीब 0.63 फीसदी की तेजी थी, जबकि चांदी 1 फीसदी से ज्यादा ऊपर कारोबार कर रही थी। 18 सितंबर को 5 अक्टूबर 2026 की एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स 1,53,940 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसमें 0.63 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, चांदी के दिसंबर 2026 वायदा अनुबंध में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। 4 दिसंबर 2026 की एक्सपायरी वाली सिल्वर फ्यूचर्स 2,41,100 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इसमें 1.22 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
शहरों में कितना है सोने-चांदी का भाव?
प्रमुख भारतीय शहरों में उपलब्ध ताजा खुदरा कीमतों के अनुसार 999 शुद्धता वाला सोना करीब 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा। वहीं 999 शुद्धता वाली चांदी का भाव करीब 2.36 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रहा। इंडिकेटिव रिटेल रेट के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,437 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,38,716 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। चांदी 2,36,163 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रही। इन कीमतों में स्थानीय टैक्स और ज्वेलरी मेकिंग चार्ज अलग हो सकते हैं।
किन वजहों से बदलते हैं सोने-चांदी के दाम?
सोने और चांदी की कीमतें कई घरेलू और वैश्विक कारकों से प्रभावित होती हैं। इनमें सबसे अहम अमेरिकी डॉलर की चाल है। दोनों धातुओं की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में तय होती है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरी करेंसी वाले खरीदारों के लिए सोना-चांदी महंगे हो सकते हैं। ब्याज दरों का भी इनकी कीमतों पर असर पड़ता है। ब्याज दरें ज्यादा होने पर बॉन्ड और बैंक डिपॉजिट जैसे विकल्प ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं, जबकि कम ब्याज दरों में कीमती धातुओं की मांग बढ़ सकती है।
महंगाई और वैश्विक तनाव का असर
महंगाई बढ़ने की आशंका के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ सकती है। युद्ध, आर्थिक संकट, व्यापारिक तनाव और शेयर बाजार में अस्थिरता के दौरान भी निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं। इसके अलावा सोने की मांग ज्वेलरी, निवेश, केंद्रीय बैंकों और तकनीकी क्षेत्र से आती है। चांदी की मांग में उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी, ऑटोमोबाइल, ज्वेलरी और निवेश की बड़ी भूमिका है। इसलिए उत्पादन और मांग में बदलाव का सीधा असर दोनों धातुओं की कीमतों पर पड़ता है।