Copper Rate: दुनिया में कॉपर यानी तांबे की कीमतों में सोमवार को तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) में कॉपर की कीमत छह महीने से ज्यादा के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता और गोदामों में घटते स्टॉक को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, LME में बेंचमार्क कॉपर की कीमत 1.1 फीसदी बढ़कर 14,310 डॉलर प्रति टन हो गई। कारोबार के दौरान यह 13,396 डॉलर प्रति टन तक भी पहुंची। इससे पहले जनवरी में कॉपर की कीमत रिकॉर्ड 14,527.5 डॉलर प्रति टन तक पहुंच चुकी है।
LME के गोदामों में स्टॉक घटा
कॉपर की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह LME के मंजूरशुदा गोदामों में घटता स्टॉक है। मई के बाद से इन गोदामों में कॉपर का भंडार करीब आधा हो चुका है और अब यह 2.10 लाख टन से भी कम रह गया है। ट्रेडर्स ने अमेरिका में संभावित रिफाइंड कॉपर आयात शुल्क को देखते हुए बड़ी मात्रा में कॉपर वहां भेजा है। इसके कारण LME के गोदामों में उपलब्ध स्टॉक लगातार कम हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, LME के कुल स्टॉक का करीब 50 फीसदी हिस्सा कैंसिल्ड वारंट के रूप में है। इसका मतलब है कि इतनी मात्रा में कॉपर एक्सचेंज की व्यवस्था से बाहर भेजे जाने के लिए तैयार है। इससे आगे भी LME में कॉपर की उपलब्धता कम होने की आशंका है।
अमेरिका और चीन में अलग तस्वीर
अमेरिका के कॉमेक्स से जुड़े गोदामों में कॉपर का स्टॉक काफी बढ़ा है। पिछले साल फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आयात शुल्क का प्रस्ताव दिए जाने के बाद वहां कॉपर का भंडार करीब 700 फीसदी बढ़कर 6.67 लाख टन हो गया है। इसके उलट, शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज से जुड़े गोदामों में कॉपर का स्टॉक मार्च के मध्य से 80 फीसदी से ज्यादा घटकर 69,731 टन रह गया है। चीन में आयातित कॉपर की मांग का संकेत देने वाला यांगशान प्रीमियम भी 22 जुलाई के 115 डॉलर से घटकर 90 डॉलर प्रति टन हो गया है। हालांकि, यह जनवरी के मुकाबले अभी भी करीब 350 फीसदी ज्यादा है।
कमजोर डॉलर से भी मिला सहारा
कॉपर के अलावा दूसरे औद्योगिक धातुओं में भी तेजी रही। एल्युमिनियम 0.5 फीसदी, जिंक 0.2 फीसदी, टिन 0.5 फीसदी और निकेल 0.3 फीसदी चढ़ा। वहीं, लेड की कीमत लगभग स्थिर रही। कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी धातुओं की कीमतों को सहारा दिया है। डॉलर कमजोर होने पर डॉलर में बिकने वाली कमोडिटी दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सस्ती हो जाती है, जिससे मांग बढ़ सकती है।
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