Search KhabarFast

Press ESC to close

Himachal Pradesh: ‘IAS कैडर की संख्या 153 से 130, फिर 110’, CM सुक्खू का बड़ा फैसला; बोले - प्रदेश में अफसरों की फौज...

Himachal Pradesh: ‘IAS कैडर की संख्या 153 से 130, फिर 110’, CM सुक्खू का बड़ा फैसला; बोले - प्रदेश में अफसरों की फौज...

Himachal Pradesh IAS cadre: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार ने IAS कैडर की स्वीकृत संख्या को 153 से घटाकर 130 करने का निर्णय लिया है। उनका तर्क है कि राज्य में वर्तमान में आवश्यकता से अधिक प्रशासनिक अधिकारी हैं। इस मामले में सुक्खू ने कहा कि सरकार ने IAS कैडर में प्रस्तावित कटौती के संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि उनका दीर्घकालिक लक्ष्य कैडर की संख्या को और घटाकर लगभग 110 करना है।

सुक्खू ने कहा ‘हिमाचल प्रदेश में 153 आईएएस अधिकारी हैं, और इनमें से कई अधिकारियों को छोटे-छोटे विभाग दिए गए हैं। उनकी प्रतिभा का भी पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पाता है।‘ मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आईपीएस कैडर की संख्या को भी कम करने पर काम कर रही है, जबकि आईएफएस कैडर को पहले ही 117 से घटाकर 83 पदों तक करने का प्रस्ताव है। सुक्खू के अनुसार, प्रशासनिक कैडरों को युक्तिसंगत बनाने से सरकार के राजस्व व्यय में लगभग 100-150 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है।

वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या कम करने से प्रशासन के कामकाज पर पड़ने वाले असर की आलोचना का जवाब देते हुए सुखु ने कहा कि राज्य में सरकार चलाने के लिए पर्याप्त अधिकारी मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा ‘अधिकारी तो हैं। कौन कहता है कि अधिकारी नहीं हैं?’ उन्होंने आगे कहा कि राज्य के हित में आवश्यक निर्णय लेते समय सरकार आलोचनाओं से विचलित नहीं होगी।

Also read: Himachal News: हिमचाल के धर्मशाला जेल में कैदियों और वार्डरों के बीच झड़प, 11 वार्डर और 4 कैदी घायल

सुक्खू ने कहा कि प्रस्तावित कैडर पुनर्गठन सरकार की "व्यवस्था परिवर्तन" की व्यापक नीति का हिस्सा है और हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद से हिमाचल प्रदेश वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, जो उनके अनुसार 1952 से राज्य को मिल रहा था।

मुख्यमंत्री ने कहा ‘कुछ निर्णय कठिन होते हैं, लेकिन वे राज्य के हित में हैं। ऐसे निर्णय चुनावों के दौरान उनके राजनीतिक प्रभाव को देखे बिना लेने पड़ते हैं।‘ सुक्खू ने कहा कि राज्य में आवश्यकता से अधिक प्रशासनिक पद हैं और सभी अधिकारियों की क्षमता का पूरी तरह से उपयोग नहीं हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।

उन्होंने आईएएस और भारतीय वन सेवा अधिकारियों की संख्या को "तर्कसंगत" बनाने के प्रस्तावों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्देश्य अधिकारियों की संख्या में कटौती करना नहीं है, बल्कि राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशासनिक संख्या को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय हिमाचल प्रदेश की प्रशासनिक आवश्यकताओं और वित्तीय स्थिति पर आधारित है और इसका उद्देश्य राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों के तहत व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना है।

Leave Your Comments



संबंधित समाचार

Uttarakhand News: बनबसा में हुई उत्तराखंड कैबिनेट की ऐतिहासिक बैठक, CM धामी ने सीमांत क्षेत्रों तक शासन पहुंचाने का संदेश दिया

CM Dhami: उत्तराखण्ड में शासन को प्रदेश के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक नई पहल की है। इसी क्रम में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे चम्पावत जनपद के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई।

Uttarakhand News: खटीमा एकलव्य विद्यालय को मिला केंद्र का साथ, जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने स्कूल विस्तार के लिए 10 करोड़ का किया ऐलान

Khatima Eklavya Vidyalaya: उत्तराखंड के खटीमा में तीन दिवसीय ‘आदि रंगोत्सव’ की शुरुआत हो चुकी है। इस दौरान केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल को याद किया और जनजातीय समाज के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

Uttarakhand News: 'जनजातीय रंगोत्सव संस्कृति और गौरव का उत्सव...', पारंपरिक रंग में रंगे CM धामी; कलाकारों के साथ खुद भी ढोल बजाया

CM Dhami on Uttarakhand Aadi Rangotsav: आज 04 अक्टूबर 2026 रविवार को उत्तराखंड के खटीमा में तीन दिवसीय आदि रंगोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्ज्वलित कर रंगोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, लोकसंगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से जनजातीय विरासत की समृद्ध झलक प्रस्तुत की।

लाइव अपडेट

बड़ी खबरें

Khabar Fast