Cyber Crime: आज के समय में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिसके लिए पुलिस भी लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी बीच, साइबर ठगी से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। दरअसल, गुजरात CID की साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCOE) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 25 वर्षीय आरोपी रफीकुल आलम को गिरफ्तार किया है। छानबीन और पूछताछ के दौरान पुलिस ने आरोपी को लेकर कई बड़े चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी कई बड़े साइबर गिरोह से जुड़ा हुआ था, जो डिजिटल अरेस्ट के जरिए लोगों को ठगने का काम करता था। इतना ही नहीं, पुलिस ने बताया कि आरोपी 1 घंटे के अंदर 1754 बैंक में रुपयों को ट्रांसफर कर देता है।
बताया जा रहा है कि आरोपी रफीकुल आलम असम के बारपेटा जिले का निवासी है और उस पर करोड़ों की साइबर ठगी करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस के अनुसार, देशभर में हुए 1,090 साइबर अपराध मामलों में आरोपी का नाम दर्ज किया गया है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी रफीकुल डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर ठगियों से मिलने वाले पैसे को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर करीब एक घंटे के अंदर 1,754 बैंक खातों में ट्रांसफर कर देता था।
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ठगी का पैसा क्रिप्टोकरेंसी में बदला
इस मामले में पुलिस ने आगे बताया कि आरोपी लोगों को लूटने के बाद उनसे मिलने वाले पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर अपने गिरोह के साथियों तक पहुंचाता था। बता दें, जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी चीन में बैठे अपराधियों से व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप के जरिए संपर्क में था। इन ऐप्स के जरिए वह उन्हें पैसे ट्रांसफर करता था। आरोपी के फोन से 23 क्रिप्टो वॉलेट बरामद किए गए। अगर इन क्रिप्टो को नकद में बदले तो करीब 16 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया है।
बता दें, पुलिस ने बताया कि रफीकुल आलम की ये गिरफ्तारी महाराष्ट्र पुलिस और सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी पत्रों के आधार पर एक वरिष्ठ नागरिक को निशाना बनाने के आरोप में हुई है। इसके अलावा आरोपी ने अलग-अलग राज्यों के कई लोगों के साथ ठगी की। इस मामले में जांच-पड़ताल करने के बाद रफीकुल आलम और उसके गिरोह के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।