Delhi News: राजधानी दिल्ली के प्रमुख विरोध प्रदर्शन स्थलों में शामिल जंतर-मंतर से बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं। दिल्ली पुलिस कमिश्नर के आदेश के बाद जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से बाहर कर दिया गया है। इसके बाद इलाके में आवाजाही पर लगी पाबंदियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस फैसले से स्थानीय लोगों और रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समूहों के विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। पिछले कई वर्षों में यहां कई बड़े आंदोलन और प्रदर्शन हुए हैं। हालांकि, लगातार होने वाले प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था के कारण आसपास के इलाके में बैरिकेडिंग और आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए थे। स्थानीय निवासियों ने इन पाबंदियों से होने वाली परेशानियों को लेकर अदालत का रुख भी किया था।
सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने बताई फैसले की वजह
जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले पर दिल्ली पुलिस ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा। पुलिस ने बताया कि यह निर्णय मुख्य रूप से केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की ओर से गठित कमिटी की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने पत्रकार स्वाति सिंह की याचिका पर दाखिल जवाबी हलफनामे में कहा कि प्रदर्शन स्थल को बदलने का प्रस्ताव काफी समय से दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के विचाराधीन था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर को डीनोटिफाई करने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के एमए बेबी मामले में दिए गए आदेश के आधार पर नहीं लिया गया था।
ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन बनी बड़ी वजह
पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर पर हर साल 1,300 से अधिक प्रदर्शन होते हैं, जबकि इस जगह पर एक समय में करीब 1,500 लोगों के खड़े होने की क्षमता है। प्रदर्शनों के कारण आसपास के क्षेत्रों में यातायात प्रभावित होता है और भीड़ को नियंत्रित करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हलफनामे में कहा गया है कि बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही में बाधा आ सकती है। इसके अलावा भीड़ के जनपथ और कनॉट प्लेस की ओर बढ़ने की आशंका से ट्रैफिक और सुरक्षा प्रबंधन की समस्या पैदा होती है। पुलिस ने आम लोगों, सरकारी कार्यालयों और आपातकालीन सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को भी फैसले की वजह बताया है।