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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से बदलेगी तस्वीर, बढ़ेंगे रोजगार और घटेगा सफर का समय

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से बदलेगी तस्वीर, बढ़ेंगे रोजगार और घटेगा सफर का समय

Delhi-Mumbai Expressway: देश की सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तेजी से विकास की नई कहानी लिख रहा है। करीब 1,350 किलोमीटर लंबा यह आधुनिक एक्सप्रेसवे दिल्ली और मुंबई के बीच यात्रा को आसान बनाने के साथ-साथ कई राज्यों की अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रहा है। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के डीएनडी फ्लाईवे से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से गुजरते हुए मुंबई के जेएनपीटी पोर्ट तक पहुंचता है। इसकी डिजाइन स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटा है। परियोजना पूरी तरह चालू होने के बाद दिल्ली से मुंबई का सफर, जो अभी लगभग 24 घंटे का है, घटकर 12 से 13 घंटे का रह जाएगा।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि माल ढुलाई की लागत में भी बड़ी कमी आएगी। इसका सीधा लाभ व्यापार और उद्योगों को मिलेगा। एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा असर इसके आसपास के शहरों में देखने को मिल रहा है। राजस्थान के अलवर, दौसा और जयपुर के अलावा मध्य प्रदेश के रतलाम तथा गुजरात के वडोदरा और सूरत जैसे शहरों में रियल एस्टेट बाजार तेजी से बढ़ रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण इन क्षेत्रों में जमीन और संपत्तियों की कीमतों में 15 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

आवासीय परियोजनाएं विकसित 

इन शहरों में नए लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक क्षेत्र और आवासीय परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। इससे निवेशकों का रुझान भी तेजी से बढ़ा है। यह परियोजना पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद मानी जा रही है। सरकारी अनुमान के अनुसार, एक्सप्रेसवे के संचालन से हर साल लगभग 32 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में करीब 85 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी।

लॉजिस्टिक्स व्यवस्था होगी मजबूत 

पीएम गतिशक्ति योजना के तहत यह एक्सप्रेसवे 93 आर्थिक केंद्रों, 8 बड़े हवाई अड्डों और 13 प्रमुख बंदरगाहों को जोड़ने का काम करेगा। इससे देश की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और मजबूत होगी। इस परियोजना से हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। छोटे और मध्यम उद्योगों को भी नए बाजार मिलेंगे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे टोल के रूप में हर महीने 1,000 से 1,500 करोड़ रुपये तक का राजस्व दे सकता है। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर भारत की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाएगा।

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