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पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग पहुंचे भाजपा नेता, ममता सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग पहुंचे भाजपा नेता, ममता सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के संबंध में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी का एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिलने पहुंचा। पश्चिम बंगाल के चुनाव सह प्रभारी एवं त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब, पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिट भट्टाचार्य, भाजपा आईटी एवं सोशल मीडिया विभाग के राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय, शांतनु ठाकुर आदि नेताओं ने पांच पन्नों का पत्र चुनाव आयोग को सौंपा।

एसआईआर के संबंध में चुनाव आयुक्त से मिलने के बाद बिप्लब देब, अमित मालवीय और समिट भट्टाचार्य ने पत्रकारों को बताया कि क्यों पश्चिम बंगाल में एसआईआर की आवश्यकता है। चुनाव आयोग को सौंपे पत्र में भाजपा की तरफ से कहा गया कि हम आयोग के ध्यान में लाना चाहते हैं कि निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से संबंधित कुछ गंभीर मुद्दे सामने आए हैं। सबसे पहले, हम यह स्वीकार करते हैं कि SIR प्रक्रिया मतदाता सूचियों की पवित्रता और शुद्धता सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। मतदान न केवल एक संवैधानिक अधिकार है, बल्कि लोकतांत्रिक शासन की नींव भी है। तथापि, यह हमारे संज्ञान में आया है कि वर्तमान पश्चिम बंगाल की परिस्थिति में मतदाता पंजीकरण हेतु उपयोग किए जा रहे दस्तावेजों के निर्गमन और प्रमाणीकरण में गंभीर अनियमितताएँ देखी जा रही हैं।

राज्य की जटिल सामाजिक-राजनीतिक परिस्थिति और दस्तावेज़ी तंत्र में व्यापक हेरफेर को देखते हुए, यह आवश्यक है कि SIR प्रक्रिया अत्यधिक सावधानी, निष्पक्षता और सत्यापन के साथ की जाए। भाजपा ने चुनाव आयोग को बंगाल की परिस्थितियां बताते हुए कुछ सुझाव भी दिए हैं।भाजपा की तरफ से कहा गया है कि बिहार में SIR के अंतर्गत पंजीकरण के लिए 11विशिष्ट दस्तावेजों को स्वीकार्य प्रमाण के रूप में पहचाना गया है। किंतु पश्चिम बंगाल की जमीनी वास्तविकताएँ भिन्न हैं। राज्य में व्यापक पैमाने पर पुराने दिनांक के और जाली दस्तावेजों का निर्गमन हुआ है, विशेष रूप से 'दुआरे सरकार' जैसी सरकारी योजनाओं के माध्यम से, जो नागरिक कल्याण के नाम पर वास्तव में सीमापार से आए अवैध प्रवासियों को दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए उपयोग की गई हैं।

अनेक क्षेत्रीय रिपोर्टों से यह संकेत मिलता है कि 2020से अब तक इन अभियानों के तहत प्रमाणपत्रों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हुई है। इन दस्तावेजों का उपयोग नागरिकता और निवास के झूठे प्रमाण के रूप में किया जा रहा है, जिससे SIR प्रक्रिया का मूल उद्देश्य वास्तविक नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना विफल हो रहा है।अतः हम आयोग से अनुरोध करते हैं कि पश्चिम बंगाल की स्थिति को एक विशेष मामला मानते हुए अन्य राज्यों की तुलना में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएँ।

भाजपा की तरफ से कहा गया कि जन्म प्रमाणपत्रों को स्वीकृत दस्तावेज़ के रूप में मान्यता मिलने के बाद पूरे राज्य में विलंबित पंजीकरणों में अचानक वृद्धि हुई है। अनेक मामलों में स्थानीय अधिकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मिलीभगत से पुराने दिनांक के प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। कई बार लोग पुलिस स्टेशन में झूठे सामान्य डायरी प्रविष्टियाँ करवाकर “डुप्लिकेट” प्रमाणपत्र प्राप्त कर लेते हैं। वर्तमान में ऐसे प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए कोई प्रभावी तंत्र उपलब्ध नहीं है, जिससे दुरुपयोग बढ़ा है। भाजपा ने सुझाव दिया है कि 24जून 2025के बाद जारी जन्म प्रमाणपत्र SIR प्रक्रिया के लिए स्वीकार न किए जाएं। यदि आवश्यक हो, तो इन्हें बूथ स्तर अधिकारी (BLO) द्वारा मामले-दर-मामले सत्यापित किया जाए।

स्थाई निवास प्रमाणपत्र स्थानीय अधिकारियों द्वारा राजनीतिक नियंत्रण में अंधाधुंध जारी किए जा रहे हैं। कई मामलों में ये केवल आधार या EPIC कार्ड पर आधारित हैं, जिनकी प्रामाणिकता पर ही प्रश्नचिह्न है, इसलिए केवल समूह-ए अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र ही स्वीकार किए जाएँ। प्रत्येक प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता और निवास की पुष्टि जारीकर्ता प्राधिकारी से कराई जाए।वन अधिकार प्रमाणपत्र में 2अप्रैल 2025को वन सचिव की अनियमित नियुक्ति के बाद से इन प्रमाणपत्रों के निर्गमन में हेरफेर बढ़ा है, इसलिए केवल 2अप्रैल 2025से पहले जारी प्रमाणपत्र ही वैध माने जाएं। इसके बाद जारी प्रमाणपत्र तभी स्वीकार हों जब सक्षम अधिकारी द्वारा नियमों के अनुसार प्रमाणित किए गए हों।

‘दुआरे सरकार’ शिविरों में बिना क्षेत्रीय जांच के बड़ी संख्या में जाति प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। अनेक प्रमाणपत्र केवल शपथ पत्रों के आधार पर जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को बड़ी संख्या में OBC-A प्रमाणपत्र दिए गए हैं, जिनमें से कई के अवैध प्रवासी होने के आरोप हैं। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पहले ही OBC-A श्रेणी को अवैध घोषित किया है और मामला न्यायालय में लंबित है, इसलिए बिना जांच जारी प्रमाणपत्र स्वीकार न किए जाएं।

भाजपा नेता ने सौंपा ज्ञापन

भाजपा नेताओं द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि 2011से 2024के बीच जारी OBC-A प्रमाणपत्रों को अंतिम न्यायिक निर्णय तक स्वीकार्य दस्तावेज़ों से बाहर रखा जाए।भाजपा ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में परिवार रजिस्टर व्यवस्थित रूप से तैयार नहीं किए गए हैं। आशंका है कि अवैध नाम जोड़ने हेतु बाद में नकली रजिस्टर तैयार किए जा रहे हैं। मनरेगा के अंतर्गत तैयार रजिस्टर विशेष रूप से अविश्वसनीय हैं क्योंकि केंद्र सरकार ने अनियमितताओं के कारण राज्य की निधि निलंबित कर दी थी, इसलिए 24जून 2025के बाद तैयार परिवार रजिस्टर और सभी मनरेगा रजिस्टर SIR हेतु अमान्य माने जाएँ।

भाजपा ने आगे लिखा है कि पश्चिम बंगाल राज्य सरकार ने (17दिसंबर 2024) और भूमि पट्टा वितरण जैसी योजनाएँ शुरू कीं, जो लाखों लोगों को कवर करती हैं। ये योजनाएँ प्रधानमंत्री आवास योजना के केंद्रीय धन बंद होने के बाद चलाई गईं। आशंका है कि ये प्रमाणपत्र निवास और नागरिकता के झूठे प्रमाण के रूप में उपयोग हो रहे हैं, इसलिए योजना के अंतर्गत जारी सभी प्रमाणपत्र अस्वीकार किए जाएँ। भूमि पट्टे केवल 24जून 2025से पूर्व जारी किए गए हों तो ही स्वीकार हों।

भाजपा ने चुनाव आयोग से की मांग

भाजपा ने मांग की है कि 1.1.2002के बाद जारी सभी प्रमाणपत्रों (जन्म, निवास, जाति, वन अधिकार आदि) का डेटाबेस जिला मजिस्ट्रेट द्वारा तैयार कर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सत्यापन हेतु भेजा जाए। आयोग उन अधिकारियों की सूची तैयार करे जो इन प्रमाणपत्रों को जारी करने के अधिकृत हैं, और उनसे लिखित पुष्टि ले कि उन्होंने पात्रता एवं निवास की व्यक्तिगत जाँच की है। जो प्रमाणपत्र किसी लंबित न्यायिक आदेश के अधीन जारी हुए हैं, उनके साथ कम से कम एक अतिरिक्त वैध दस्तावेज़ संलग्न हो। EROs और AEROs के लिए शून्य-सहनशीलता सत्यापन नीति लागू की जाए। पश्चिम बंगाल की विशिष्ट परिस्थिति में निम्न दस्तावेज भी स्वीकार किए जा सकते हैं। जिसमें भूमि खातियान (Record of Rights) जो 2020के पहले दुआरे सरकार शिविर से पहले दर्ज किए गए हों। PROFLAL (भूमिहीन कृषि श्रमिकों के भविष्य निधि पंजीकरण) जो पिछले SIR से पहले हुए हों।

इन परिस्थितियों में यह अत्यावश्यक है कि पश्चिम बंगाल में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया सख्त निगरानी और स्वतंत्र सत्यापन के साथ की जाए। बिना इन सुरक्षा उपायों के दस्तावेज़ स्वीकार करने से स्वच्छ और वैध मतदाता सूची का उद्देश्य निष्फल हो जाएगा।भाजपा ने आयोग से अनुरोध करते हुए लिखा हैं कि उपरोक्त अनुशंसाएँ पश्चिम बंगाल के SIR प्रोटोकॉल में शामिल की जाएं। इससे न केवल अयोग्य और गैर-नागरिक मतदाताओं को बाहर रखा जा सकेगा बल्कि जनता का लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास भी पुनर्स्थापित होगा।

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