जनता को जोरदार झटका! अक्टूबर में 6.2% तक पहुंची मंहगाई दर, EMI में अभी राहत नहीं

जनता को जोरदार झटका! अक्टूबर में 6.2% तक पहुंची मंहगाई दर, EMI में अभी राहत नहीं

Retail Inflation Rate: देश में महंगाई दर लगातार उच्चतम स्तरों पर बनी हुई है। अक्टूबर 2024में यह 14महीने का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 6.2प्रतिशत तक पहुंच गई, जो पिछले महीने के 5.5प्रतिशत से कहीं अधिक है। इस वृद्धि का मुख्य कारण सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी है, जो खाद्य महंगाई दर को प्रभावित कर रही है। कई विशेषज्ञों ने पहले ही अनुमान जताया था कि अक्टूबर में महंगाई दर 6प्रतिशत के आसपास रह सकती है, जो अब साकार हो चुका है।

क्या रेपो रेट में कमी की उम्मीद है?

महंगाई दर के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद, अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दिसंबर 2024में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) बैठक में रेपो रेट को 6.5प्रतिशत पर बनाए रखेगा। पिछले दस महीनों से रेपो रेट इसी स्तर पर स्थिर है, और अगर इस बार भी इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाता, तो यह लगातार 11वां मौका होगा जब रेपो रेट में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इससे पहले, सितंबर में महंगाई दर 5.5प्रतिशत तक पहुंची थी, जो नौ महीनों का रिकॉर्ड था।

महंगाई दर RBIके लक्ष्य से ऊपर

RBIका लक्ष्य महंगाई दर को 6प्रतिशत से नीचे बनाए रखना है, लेकिन अक्टूबर में यह आंकड़ा 6.2प्रतिशत तक पहुंच गया। पिछले साल इसी महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 4.87प्रतिशत थी। आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य वस्तुओं में महंगाई दर अक्टूबर में 10.87प्रतिशत तक पहुंच गई, जो सितंबर में 9.24प्रतिशत और पिछले साल अक्टूबर में 6.61प्रतिशत थी। सरकार ने RBIसे महंगाई दर को 4प्रतिशत के आसपास बनाए रखने की उम्मीद जताई है, जिसमें 2प्रतिशत का उतार-चढ़ाव हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण ब्याज दरों में कटौती का दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्याज दरों में कटौती का दबाव भारत पर भी पड़ रहा है। हाल ही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत दर में 75बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। इसके अलावा, यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने भी ब्याज दरों में कमी की घोषणा की है। इस बदलाव के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक पर भी रेपो रेट में कटौती का दबाव बढ़ा है। हालांकि, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024में रेपो रेट में कटौती की संभावना कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2025तक भारत के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती का ऐलान किया जा सकता है।

महंगाई दर और ब्याज दरों में बदलाव का असर

महंगाई दर में कमी आने का सबसे बड़ा असर ब्याज दरों पर पड़ता है। अगर महंगाई दर घटती है, तो रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दर में कटौती की संभावना बढ़ जाती है। इसका असर बैंकों द्वारा दिए जाने वाले कर्जों पर पड़ेगा। कम ब्याज दरों से ग्राहकों को सस्ते लोन मिलेंगे और बैंकों से मिलने वाली ऋण राशि पर कम ब्याज लगेगा। इसके अलावा, ब्याज दरों में कमी का असर ईएमआई (EMI) पर भी देखा जाएगा। हालांकि, अक्टूबर में महंगाई दर में वृद्धि ने इस संभावना को कम कर दिया है कि दिसंबर में रेपो रेट में कोई बड़ी कटौती की जाएगी।

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