देशभर में FASTag आधारित टोल कलेक्शन सिस्टम को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सभी FASTag जारी करने वाले बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपने रिकॉर्ड में दर्ज वाहन पंजीकरण संख्या (Vehicle Registration Number- VRN) का तत्काल सत्यापन करें।
नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि किसी FASTag से जुड़ा वाहन नंबर गलत पाया जाता है या वह आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता है, तो संबंधित टैग को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
डेटा की शुद्धता बढ़ाने पर सरकार का जोर
NHAI ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) सिस्टम में डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। सभी FASTag जारीकर्ता बैंकों को अपने रिकॉर्ड की समीक्षा कर वाहन पंजीकरण विवरण का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।
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सरकार का मानना है कि सटीक डेटा न केवल टोल कलेक्शन सिस्टम को मजबूत बनाएगा, बल्कि भविष्य की आधुनिक टोलिंग तकनीकों के सफल संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
शिकायतों के बाद लिया गया फैसला
हाल के दिनों में कई मामलों में यह पाया गया कि टोल प्लाजा पर लगे FASTag रीडर द्वारा दर्ज वाहन संख्या और वाहन की वास्तविक नंबर प्लेट में अंतर था। इस तरह की विसंगतियों के कारण टोल संग्रह प्रणाली में परेशानी के साथ-साथ सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई।
सरकार के अनुसार, गलत वाहन विवरण का उपयोग मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत कानूनी कार्रवाई का विषय भी बन सकता है और इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कार्य में बाधा उत्पन्न होती है।
पुराने FASTag में अधिक पाई गईं गड़बड़ियां
अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश डेटा मिसमैच उन FASTag खातों में पाए गए हैं, जो वाहन (VAHAN) डेटाबेस से स्वचालित रूप से जुड़ने से पहले जारी किए गए थे। उस समय वाहन विवरण का सत्यापन मुख्य रूप से मैन्युअल प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता था, जिससे त्रुटियों की संभावना अधिक रहती थी।
अब सरकार सभी रिकॉर्ड को स्वचालित और केंद्रीकृत प्रणाली के साथ पूरी तरह सिंक्रोनाइज करना चाहती है।
गलत जानकारी मिलने पर होगा ब्लैकलिस्ट
नई व्यवस्था के तहत यदि जांच के दौरान किसी FASTag के साथ लिंक किया गया वाहन नंबर गलत, अवैध या रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता पाया जाता है, तो संबंधित बैंक उस टैग को तत्काल ब्लैकलिस्ट कर देगा।
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ऐसी स्थिति में वाहन मालिक को टोल प्लाजा पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए वाहन मालिकों को सलाह दी गई है कि वे अपने FASTag और वाहन संबंधी विवरण की जांच कर लें।
MLFF तकनीक के लिए जरूरी है सटीक डेटा
NHAI ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में देशभर में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम लागू करने की योजना है। इस तकनीक के तहत वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी और कैमरे व सेंसर चलते वाहनों से स्वतः टोल शुल्क वसूल करेंगे।
इस प्रणाली में ई-नोटिस, चालान और टोल भुगतान पूरी तरह डिजिटल रिकॉर्ड पर आधारित होंगे। ऐसे में वाहन और FASTag डेटा का सटीक होना बेहद आवश्यक है।
क्या है MLFF तकनीक?
मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) एक आधुनिक टोलिंग प्रणाली है जिसमें पारंपरिक टोल बूथ की आवश्यकता नहीं होती। हाईवे पर लगाए गए कैमरे और सेंसर वाहन की नंबर प्लेट तथा FASTag को स्कैन कर स्वचालित रूप से टोल शुल्क काट लेते हैं।
इससे वाहनों को बिना रुके यात्रा करने की सुविधा मिलती है और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होती है।
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FASTag यूजर्स क्या करें?
- सुनिश्चित करें कि आपके FASTag से सही वाहन नंबर लिंक है।
- FASTag खाते का KYC अपडेट रखें।
- यदि आपने पुरानी गाड़ी खरीदी है, तो पुराने मालिक का FASTag हटवाकर नया टैग जारी करवाएं।
- समय-समय पर बैंक या FASTag पोर्टल पर जाकर वाहन विवरण की जांच करें।
- किसी भी त्रुटि की स्थिति में संबंधित बैंक से तुरंत संपर्क करें।
ऐसे चेक करें FASTag स्टेटस
वाहन मालिक 'My FASTag' मोबाइल ऐप या संबंधित बैंक के FASTag पोर्टल पर जाकर अपने वाहन पंजीकरण विवरण और टैग की स्थिति की जांच कर सकते हैं।