
Bhojshala Row: भोजशाला विवाद को लेकर एएसआई की रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पेश कर दी गई है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों से आपत्तियां दर्ज कराने का निर्देश दिया है। बता दें कि एएसआई के 98 दिनों की जांच के बाद 2089 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट में कई पुरातात्विक और धार्मिक सबूत होने का उल्लेख किया गया है।
सर्वे रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि परिसर में भगवान शिव, विष्णु, वासुकी नाग और गणेश सहित कई पुरानी मूर्तियां और शिल्प मिले हैं। जिनका केमिकल ट्रीटमेंट कर उन्हें सबूत के रूप में पेश किया गया है। सर्वे में प्रमाण मिला है कि कमाल मौला मस्जिद के निर्माण के लिए भोजशाला के अवशेषों का उपयोग किया गया था।
भगवान शिव की मूर्तियों के अवशेष
रिपोर्ट के मुताबिक, एएसआई को भगवान शिव और वासुकी नाग की पौराणिक मूर्तियां सहित कई पुरातात्वकि अवशेष मिले हैं। सर्वे के दौरान 1700 से अधिक कलाकृतियां सामने आई है। जिनमें कई मूर्तियां, संरचनाएं, स्तंभ, दिवारें और भित्ति चित्र शामिल है। इसके अलावा, बड़ी संख्या में संस्कृत, देवनागरी और नागरी लिपि के अभिलेख, स्तंभों पर खुदे श्लोक, देवी–देवताओं की प्रतिमाओं के अवशेष, मंदिर स्थापत्य के अंग और वास्तु सामग्री मिलने का जिक्र किया गया है।
मस्जिद को लेकर क्या दावा
एएसआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि आधार स्तर पर दीवारों की रेखाएं, स्तंभ आधार और पत्थरों के फर्श के अवशेष मिले। जिनकी दिशा और विन्यास पारंपरिक मंदिर वास्तु योजना से मिलता-जुलता है। कुछ जगहों पर यज्ञकुंड जैसी संरचनात्मक आकृतियों का भी जिक्र किया गया है। परिसर में फारसी और अरबी भाषा के अभिलेख भी पाए गए हैं, जो बाद में कालखंड में मस्जिद या दरगाह के रूप में उपयोग किया गया। कमाल मौला से संबंधित अभिलेखों और शिलालेखों में सूफी परंपरा के उल्लेख भी है।
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