SAD BJP Alliance Punjab: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ आने की चर्चा तेज हो गई है। अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के एक दिन बाद पार्टी ने परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल को समर्थन देने का ऐलान किया है। इसे दोनों दलों के बीच गठबंधन की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। सुखबीर सिंह बादल ने शनिवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि अकाली दल देश में महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू करने के पक्ष में है। उन्होंने केंद्र के सभी राज्यों में विधानसभा सीटों में समान रूप से 50 फीसदी बढ़ोतरी के प्रस्ताव का भी समर्थन किया।
पहले बिल का विरोध कर चुका है SAD
खास बात यह है कि अकाली दल ने अप्रैल में संसद में परिसीमन बिल पेश होने के समय इसका विरोध किया था। पार्टी ने तब इसे पंजाब के लिए भेदभावपूर्ण बताया था। अकाली दल का कहना था कि परिसीमन के बाद पंजाब की सीटों में मामूली बढ़ोतरी होगी, जबकि पड़ोसी राज्यों को ज्यादा फायदा मिलेगा। अब पार्टी ने 50 फीसदी सीट बढ़ाने की शर्त के साथ परिसीमन के प्रस्ताव का समर्थन किया है। बादल ने कहा कि परिसीमन ऐसा होना चाहिए, जिससे सभी राज्यों को उचित और समान प्रतिनिधित्व मिले।
2020 में टूटा था BJP-SAD गठबंधन
बीजेपी और अकाली दल का करीब ढाई दशक पुराना गठबंधन 2020 में तीन कृषि कानूनों के विवाद के दौरान टूट गया था। इसके बाद अकाली दल ने NDA से अलग होने का फैसला किया था। दोनों पार्टियों ने 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पंजाब में एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि अकाली दल को सिर्फ एक सीट मिली।
गठबंधन की वापसी पर चर्चा तेज
सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद दोनों दलों के दोबारा साथ आने की अटकलें तेज हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक, अकाली दल, पंजाब बीजेपी और RSS के कई नेता गठबंधन की वापसी के पक्ष में हैं। बीजेपी में कांग्रेस से आए कुछ नेता भी गठबंधन बहाल करने के समर्थन में बताए जा रहे हैं। हालांकि अंतिम फैसला बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी अब गठबंधन में बराबरी की भूमिका चाहती है। पहले गठबंधन में अकाली दल बड़ा साझेदार था और बीजेपी की भूमिका छोटी थी। वहीं अकाली नेताओं का कहना है कि सीटों के बंटवारे जैसे मुद्दों पर बाद में बातचीत हो सकती है। फिलहाल प्राथमिकता पंजाब की राजनीतिक स्थिति को मजबूत करना है। ऐसे में आगामी पंजाब चुनाव से पहले BJP-SAD गठबंधन की वापसी की संभावना ने राज्य की सियासत को गर्म कर दिया है।
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