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Uttarakhand News: हरेला पर धामी सरकार का बड़ा संदेश, पर्यावरण और जल संरक्षण को बताया जरूरी

Uttarakhand News: हरेला पर धामी सरकार का बड़ा संदेश, पर्यावरण और जल संरक्षण को बताया जरूरी

Uttarakhand News: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हरेला के मौके पर जनता को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने एक टिकाऊ भविष्य की वकालत करते हुए नागरिकों से प्रकृति का सम्मान करने और उसे बचाने की पुरानी परंपरा को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमें पानी और जीवन को बचाना चाहिए और अपने पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण करना चाहिए।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने हरेला त्योहार के लिए शुभकामनाएं दीं और नागरिकों से अपने पूर्वजों द्वारा शुरू की गई प्रकृति-अनुकूल परंपराओं पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मैं हरेला के मौके पर सभी को शुभकामनाएं देता हूं। उत्तराखंड की पवित्र भूमि पर हरेला त्योहार का प्राचीन काल से ही बहुत महत्व रहा है। हमारे पूर्वजों ने इसे प्रकृति का सम्मान करने और उसके संरक्षण को बढ़ावा देने वाले त्योहार के रूप में मनाया है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने जलवायु से जुड़ी बढ़ती चिंताओं के बीच राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें प्रकृति की 'रक्षा' करनी चाहिए और अपने जल स्रोतों को बचाना चाहिए। उन्होंने कहा, "आज हम ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।  मौसम का मिज़ाज अब वैसा नहीं रहा जैसा उस मौसम में होना चाहिए। मॉनसून के दौरान सूखा पड़ता है और सूखे के समय बारिश होती है; सर्दियाँ गर्म हो रही हैं और गर्मियाँ ठंडी--प्रकृति का चक्र बदल रहा है। ऐसे समय में, यह बहुत ज़रूरी है कि हम अपने जल स्रोतों को बचाएँ और प्रकृति की रक्षा करें।

धामी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि हिमालय का घर और प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल होने के नाते, धरती की रक्षा के लिए आवाज़ उठाना राज्य का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा, "उत्तराखंड हिमालय और गंगा व यमुना जैसी पवित्र नदियों का घर है, और यहाँ की 70 प्रतिशत से ज़्यादा ज़मीन पर जंगल हैं। इससे हम पर यह खास ज़िम्मेदारी आती है कि हम यहाँ से पूरी धरती को बचाने का संदेश दें। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "हमें पेड़ लगाने चाहिए, पानी और जीवन को बचाना चाहिए, और तालाबों, टैंकों व बावड़ियों जैसे पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण करना चाहिए।

उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल में, 'हरेला' त्योहार मॉनसून और सावन की शुरुआत का प्रतीक है। इसमें फसलों, हरियाली और पर्यावरण से जुड़े रीति-रिवाज़ निभाए जाते हैं। इससे पहले मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 'हरेला' त्योहार के मौके पर पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक के मालाग्राम में बड़े पैमाने पर चलाए गए वृक्षारोपण अभियान में हिस्सा लिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और हरे-भरे उत्तराखंड का संदेश देने के लिए एक पौधा भी लगाया।

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