UP News: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने रिश्तों की बुनियाद को झकझोर कर रख दिया। जिस पिता ने कभी बेटे की उंगली पकड़कर उसे चलना सिखाया, गिरने पर संभाला, उसी पिता ने अपने दूसरे बेटे और पोते के साथ मिलकर उसकी जिंदगी छीन ली। जिस भाई के साथ बचपन की हंसी, खेल और यादें जुड़ी थीं, वही भाई उसकी मौत का साझेदार बन गया। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि रिश्तों के विश्वास का निर्मम कत्ल है।
दरअसल थाना सुनगढ़ी क्षेत्र के ग्राम संतोषपुरा निवासी होरीलाल की मौत की सूचना पहले आत्महत्या के रूप में पुलिस को दी गई। बताया गया कि उसने आम के बाग में फांसी लगाकर जान दे दी है। सूचना मिलते ही पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। लेकिन घटनास्थल पर मिले कुछ ऐसे सुराग थे जिन्होंने पूरी कहानी बदल दी।
मृतक के पैर के पंजे पर गंभीर चोट के निशान मिले। पुलिस को मामला संदिग्ध लगा। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। पूछताछ और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सामने आया कि 24 जून की रात होरीलाल रुद्रपुर से अपने घर लौटा था। गांव वालों ने पुलिस को बताया कि देर रात उसके साढ़ू कृष्ण उर्फ नन्हेलाल के घर की तरफ से तेज आवाज आई थी और एक व्यक्ति वहां से कूदकर भागा था। टीनशेड पर खून के निशान और पैर में लगी चोट ने भी कई सवाल खड़े कर दिए।जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, शक घर की चौखट के अंदर पहुंच गया। मृतक की पत्नी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने परिजनों से पूछताछ शुरू की आखिरकार पुलिस ने मृतक के पिता ढाकनलाल, भाई और भतीजे को हिरासत में लिया। पूछताछ में जो सच सामने आया, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।
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पुलिस के अनुसार, जमीन के बंटवारे और आए दिन होने वाले विवाद से परेशान होकर तीनों ने मिलकर होरीलाल का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। लेकिन अपराध यहीं नहीं रुका। हत्या के बाद सच्चाई को छिपाने और कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए शव को आम के बाग में फांसी के फंदे पर लटका दिया गया, ताकि पूरा मामला आत्महत्या लगे और हत्या के साक्ष्य हमेशा के लिए दब जाएं। लेकिन पुलिस की सतर्कता और वैज्ञानिक जांच ने इस साजिश का पर्दाफाश कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि होरीलाल की मौत फांसी से नहीं, बल्कि गला दबाकर हत्या की गई है। इसके बाद पुलिस ने पिता, भाई और भतीजे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि उस दर्दनाक सच्चाई की तस्वीर है जहां लालच, गुस्सा और पारिवारिक विवाद इंसान को इस हद तक अंधा कर देते हैं कि वह अपने ही खून का दुश्मन बन जाता है। जिस पिता के कंधों पर बेटे की परवरिश की जिम्मेदारी थी, उन्हीं हाथों ने उसकी सांसें छीन लीं। जिस भाई के साथ बचपन बीता, वही उसकी जिंदगी का आखिरी दुश्मन बन गया।