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हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों के लिए आई तबादला नीति, तबादलों में बढ़ेगी पारदर्शिता, मेरिट आधारित होगा सिस्टम

हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों के लिए आई तबादला नीति, तबादलों में बढ़ेगी पारदर्शिता, मेरिट आधारित होगा सिस्टम

Haryana News:हरियाणा सरकार ने राज्य के विभिन्न विभागों एवं संगठनों में कार्यरत नियमित कर्मचारियों के स्थानांतरण एवं नियुक्ति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष तथा मेरिट आधारित बनाने के उद्देश्य से मॉडल ऑनलाइन स्थानांतरण नीति-2026 अधिसूचित कर दी है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा इस  नीति की अधिसूचना जारी कर दी गई है।

यह नीति उन सभी नियमित कर्मचारियों पर लागू होगी, जिनके संवर्ग (कैडर) में स्वीकृत पदों की संख्या 50 या उससे अधिक है। हालांकि, अखिल भारतीय सेवाओं तथा हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) एवं संबद्ध सेवाओं के अधिकारियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। मानव संसाधन विभाग आवश्यकतानुसार 50 से कम स्वीकृत पदों वाले संवर्गों पर भी इस नीति को लागू कर सकेगा।

इस नीति के अंतर्गत संबंधित संवर्ग के सभी पद, जहां लागू हो वहां मुख्यालय पद भी, स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल किए जाएंगे। नियमित सरकारी विभागों के अलावा राज्य सरकार के अन्य संगठन भी इस नीति को अपना सकते हैं।

स्थानांतरण प्रक्रिया में भागीदारी के लिए कर्मचारियों को सात श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। डीम्ड श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल होंगे जिन्होंने किसी इकाई में निर्धारित कार्यकाल पूरा कर लिया है और जिनका स्थानांतरण अनिवार्य है। स्वैच्छिक श्रेणी में वे कर्मचारी आएंगे जिन्होंने न्यूनतम कार्यकाल पूरा कर लिया है लेकिन निर्धारित कार्यकाल पूरा नहीं किया है तथा जो स्वेच्छा से स्थानांतरण प्रक्रिया में भाग लेना चाहते हैं।

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न्यूनतम कार्यकाल पूरा नहीं करने वाली श्रेणी में वे कर्मचारी होंगे जिन्होंने न्यूनतम आवश्यक अवधि पूरी नहीं की है। सामान्यतः ऐसे कर्मचारी स्थानांतरण के पात्र नहीं होंगे। नोशनल श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल आएंगे जो पिछली स्थानांतरण प्रक्रिया की अर्हता तिथि के बाद प्रारंभिक नियुक्ति, पदोन्नति, रिइंस्टेटमेंट, अध्ययन अवकाश से वापसी अथवा प्रतिनियुक्ति से वापसी के माध्यम से संवर्ग में आए हैं। सरप्लस श्रेणी में ऐसे कर्मचारी होंगे जो उन इकाइयों में कार्यरत हैं जहां प्रशासनिक आवश्यकता से अधिक कर्मचारी तैनात हैं। स्थानांतरण प्रक्रिया में इनकी भागीदारी अनिवार्य होगी।

संरक्षित श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल होंगे जो अर्हता तिथि से 18 माह के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले हैं, कैंसर, डायलिसिस, पिछले दो वर्षों में बाईपास हार्ट सर्जरी अथवा अंग प्रत्यारोपण जैसे उपचार से गुजर रहे हैं, 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारी हैं तथा ऐसी विधवा महिला कर्मचारी हैं जिनका सबसे छोटा बच्चा 10 वर्ष तक की आयु का है। एक्सक्लूडेड या अपवर्जित श्रेणी में ऐसे कर्मचारी शामिल होंगे जो प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं, अध्ययन अवकाश पर हैं, 180 दिनों से अधिक अनुपस्थित, निलंबित अथवा सेवा से बाहर किए गए हैं।

नीति के तहत स्थानांतरण के लिए 120 अंकों की मेरिट प्रणाली लागू की गई है, जिसके आधार पर कर्मचारियों की रैंकिंग निर्धारित होगी और उन्हें इकाइयों का आवंटन किया जाएगा। इसमें आयु के लिए अधिकतम 30 अंक (25 प्रतिशत वेटेज), संवर्ग में अनुभव के लिए अधिकतम 30 अंक (25 प्रतिशत वेटेज) तथा विशेष कारकों के लिए अधिकतम 60 अंक (50 प्रतिशत वेटेज) निर्धारित किए गए हैं।

आयु के अंक अर्हता तिथि और जन्म तिथि के बीच दिनों की संख्या को 365 से विभाजित कर तथा उसे आधे से गुणा कर निर्धारित किए जाएंगे। अनुभव के अंक संवर्ग में नियुक्ति तिथि और अर्हता तिथि के बीच दिनों की संख्या के आधार पर निर्धारित होंगे।

विशेष कारकों के अंतर्गत महिला कर्मचारियों को 10 अंक दिए जाएंगे, सिवाय उन संवर्गों के जहां सभी कर्मचारी महिलाएं हों। तलाकशुदा, न्यायिक रूप से पृथक, विधवा अथवा एकल अभिभावक कर्मचारियों को 10 अंक मिलेंगे। पति-पत्नी के मामलों में, जहां जीवन-साथी हरियाणा, दिल्ली या चंडीगढ़ में किसी सरकारी संगठन में नियमित कर्मचारी हो, 10 अंक प्रदान किए जाएंगे।

सेवारत सैन्य अथवा अर्धसैनिक बलों के कर्मियों के जीवन-साथियों को भी 10 अंक मिलेंगे। गंभीर एवं दुर्बलकारी रोगों से पीड़ित कर्मचारी अथवा उनके जीवन-साथी, अविवाहित पुत्र या पुत्री को, विधिवत गठित मेडिकल बोर्ड के प्रमाण-पत्र के आधार पर, 10 अंक दिए जाएंगे। 40 प्रतिशत या उससे अधिक बेंचमार्क दिव्यांगता वाले बच्चों के माता-पिता कर्मचारियों को 10 अंक तथा 40 से 70 प्रतिशत तक बेंचमार्क दिव्यांगता वाले कर्मचारियों को भी 10 अंक प्रदान किए जाएंगे।

हरियाणा सिविल सेवा (दण्ड एवं अपील) नियम, 2016 के तहत प्रमुख दंड मिलने पर दंड अवधि भुगत रहे कर्मचारियों के 10 अंक काटे जाएंगे। यदि दो कर्मचारियों के अंक समान हों तो अधिक आयु, महिला कर्मचारी तथा उसके बाद वर्णानुक्रम के आधार पर प्राथमिकता तय की जाएगी। संरक्षित श्रेणी के कर्मचारियों को सीधे 120 मेरिट अंक प्रदान किए जाएंगे।

पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया हरियाणा मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) से एकीकृत ऑनलाइन सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होगी। प्रथम चरण में नोडल अधिकारी स्थानांतरण अभियान प्रारंभ करेगा, अर्हता तिथि और संभावित कार्यक्रम तय करेगा, आंकड़े अपडेट करेगा तथा कर्मचारियों की प्रारंभिक सूची प्रकाशित करेगा।

द्वितीय चरण में कर्मचारी अपने विवरण सत्यापित करेंगे अथवा पांच दिनों के भीतर आपत्तियां दर्ज कर सकेंगे। विभागाध्यक्ष इनका निपटारा करेंगे। तृतीय चरण में स्वैच्छिक एवं संरक्षित श्रेणी के कर्मचारियों को पांच दिनों के भीतर भागीदारी के लिए अपनी सहमति देनी होगी।

चौथे चरण में विभाग 15 दिनों के भीतर रेशनलाइजेशन प्रक्रिया पूरी करेगा, सरप्लस एवं रिक्त पदों की पहचान करेगा तथा अंतिम सूची प्रकाशित करेगा। पांचवें चरण में, भाग लेने वाले कर्मचारी पांच दिनों के भीतर अपनी पसंदीदा इकाइयों का चयन करेंगे। जो कर्मचारी विकल्प नहीं देंगे, उन्हें राज्य में कहीं भी नियुक्त किया जा सकेगा।

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छठे चरण में मेरिट के आधार पर इकाइयों का आवंटन किया जाएगा। सातवें चरण में सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद स्थानांतरण आदेश जारी किए जाएंगे तथा दस दिनों के भीतर उनका अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। आठवें चरण में कोई भी कर्मचारी आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर, नई जगह कार्यभार ग्रहण करने के बाद, इंट्रा हरियाणा पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायत या प्रतिवेदन प्रस्तुत कर सकेगा। हाल ही में विवाह, विधवा होने, तलाक अथवा न्यायिक अलगाव की स्थिति में महिला कर्मचारी घटना के छह माह के भीतर उपलब्ध रिक्त पद के विरुद्ध अपनी पसंद के स्थान पर नियुक्ति के लिए आवेदन कर सकेगी।

चिकित्सकीय आवश्यकता, निकटतम संबंधी की मृत्यु अथवा सेवानिवृत्ति में एक वर्ष से कम अवधि शेष रहने जैसी परिस्थितियों में कर्मचारी स्थानांतरण अभियान से बाहर भी अस्थायी स्थानांतरण अथवा मुख्यालय परिवर्तन का अनुरोध कर सकेंगे। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री द्वारा लिया जाएगा।

किसी भी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पूर्व उसकी लिखित सहमति के बिना स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। सामान्य ऑनलाइन स्थानांतरण प्रक्रिया वर्ष में एक बार आयोजित की जाएगी। पदोन्नति, सीधी भर्ती अथवा प्रशासनिक आवश्यकता के मामलों में मुख्यमंत्री की पूर्व स्वीकृति से किसी भी समय स्थानांतरण किया जा सकेगा।

नीति में स्पष्ट किया गया है कि स्थानांतरण मामलों में किसी भी प्रकार की सिफारिश, व्यक्तिगत पत्राचार अथवा बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसा कोई भी प्रयास अनुचित प्रभाव डालने का प्रयास माना जाएगा और संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

मुख्यमंत्री को किसी भी कर्मचारी का स्थानांतरण करने, उसे स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर रखने अथवा नीति के किसी भी प्रावधान में ढील देने का अधिकार होगा। नीति की व्याख्या और स्पष्टीकरण के संबंध में मानव संसाधन विभाग अंतिम प्राधिकारी होगा।

नीति के अंतर्गत मान्यता प्राप्त गंभीर रोगों में हृदय रोग, कार्डियक डिसरिद्मिया, इंटरस्टिशियल लंग डिजीज, सिस्टिक फाइब्रोसिस, लिवर सिरोसिस, क्रॉनिक किडनी फेल्योर, मिर्गी, पैराप्लेजिया, क्वाड्रिप्लेजिया, हेमीप्लेजिया, पार्किंसन रोग, मोटर न्यूरॉन रोग सहित तंत्रिका तंत्र के अपक्षयी रोग, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार, सेरिब्रल वैस्कुलर दुर्घटना, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, मायोपैथी, थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, एप्लास्टिक एनीमिया, सभी प्रकार के कैंसर, स्किजोफ्रेनिया, एड्स, अंग प्रत्यारोपण, बेहसेट डिसीज़ तथा मस्कुलर डिस्ट्रॉफी शामिल हैं।

नीति का विस्तृत विवरण csharyana.gov.in पर उपलब्ध है।

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