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‘रील के जमाने में Shortcut से बचें’, PM मोदी ने युवाओं को दिया गुरुमंत्र; कहा - धैर्य और संघर्ष ही असली रास्ता...

‘रील के जमाने में Shortcut से बचें’, PM मोदी ने युवाओं को दिया गुरुमंत्र; कहा - धैर्य और संघर्ष ही असली रास्ता...

PM Modi on Youth: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 12 अगस्त बुधवार पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ऑटोबायोग्राफी- 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स' का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने विमोचन कार्यक्रम को संबोधित किया और कहा कि पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की आत्मकथा युवाओं को प्रेरित कर सकती है। उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे शॉर्टकट और सोशल मीडिया सामग्री पर निर्भर रहने के बजाय आत्मकथाएं पढ़ें। उन्होंने कहा कि कोविंद ने अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद भी 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' जैसे अहम मुद्दों पर काम करना जारी रखा है और कहा कि इस मुद्दे का समाधान भारत के लोकतंत्र में एक नया अध्याय खोल सकता है।

विमोचन के अवसर पर PM मोदी ने कहा ‘मैं एक बार फिर उनकी आत्मकथा के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूं और विशेष रूप से युवा पीढ़ी से निवेदन करता हूं: यह रील का युग है, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आपको दूर ले जाते हैं, लेकिन शॉर्टकट के इस युग में हमें रेलवे स्टेशनों पर लिखी एक बात याद रखनी चाहिए – ‘शॉर्टकट आपको नुकसान पहुंचाएंगे।‘ यदि आप शॉर्टकट लेना चाहते हैं, तो मैं युवाओं से कहता हूं, जिसकी भी आत्मकथा आपको पसंद आए, कृपया उसे पढ़ें।‘

PM मोदी ने आगे कहा ‘कोविंद जी ने मोरारजी भाई देसाई के साथ अपने अनुभवों के बारे में भी विस्तार से बताया है... राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी उन्होंने आराम नहीं किया; वे 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करना जारी रखे हुए हैं और राष्ट्र को इनके महत्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। इस मुद्दे का समाधान देश के लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय खोल सकता है।‘

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प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति की विनम्रता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें कार के दरवाजे तक विदा किया और बाद में उनके गांव की यात्रा के दौरान उनके शिक्षकों के पैर छुए। उन्होंने कहा ‘मुझे याद है कि प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मैंने पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की थी। प्रोटोकॉल के अनुसार, वे अक्सर औपचारिकताओं से परे जाकर बातचीत करते थे। वे प्रधानमंत्री को कार के दरवाजे तक छोड़ने आते थे। शुरू में मैंने उनसे ऐसा न करने का आग्रह किया था। फिर भी, उन्होंने अपनी विनम्रता कभी नहीं छोड़ी।‘

PM मोदी ने आगे कहा ‘राष्ट्रपति बनने के बाद, जब वे अपने गांव परौंख गए, तो उन्होंने श्रद्धापूर्वक अपने गुरुओं के चरण स्पर्श किए। उन्होंने गांव की मिट्टी को नमन किया और आम ग्रामीणों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। पूरे देश ने उस भावपूर्ण दृश्य को देखा। उनके आचरण ने दुनिया के सामने भारत के सांस्कृतिक मूल्यों की एक छवि प्रस्तुत की - एक ऐसी छवि जो हर भारतीय को गर्व से भर देती है।‘ उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति के बचपन की उस त्रासदी को याद किया, जिसमें उन्होंने घर में आग लगने से अपनी मां को खो दिया था, और कहा कि इतनी कम उम्र में इस तरह के नुकसान के दर्द की कल्पना करना मुश्किल है। उन्होंने कहा ‘मैं भाग्यशाली रहा; मेरी मां सौ साल से अधिक जीवित रहीं और मुझे आशीर्वाद देती रहीं।” फिर भी, आज भी मुझे उनकी अनुपस्थिति से उत्पन्न खालीपन का गहरा एहसास होता है।‘

उन्होंने कहा ‘कोविंद जी ने अभी-अभी एक घटना का वर्णन किया है—और अपनी पुस्तक में भी लिखा है—जिसमें गर्मियों के दौरान उनके घर में आग लग गई थी। उनकी मां ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना घर का सामान बचाने की कोशिश की; आखिर एक सामान्य परिवार के लिए बच्चों के पालन-पोषण के लिए हर एक चीज जरूरी होती है। दुर्भाग्य से, इसी कोशिश में वह आग में फंस गईं और उनकी जान चली गई। जरा सोचिए—कम उम्र में ऐसी त्रासदी झेलना, इस तरह मां को खोना... कितना दर्दनाक रहा होगा।‘

प्रधानमंत्री ने उनकी आत्मकथा को किसी व्यक्ति की सफलता में समाज की भूमिका को स्वीकार करने का एक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा ‘उनका संघर्ष व्यक्तिगत था, लेकिन उन संघर्षों से मिली जीत भारत के गणतंत्र और उसके लोकतंत्र की देन है। हम अक्सर देखते हैं कि लोग अपनी सफलताओं का श्रेय खुद लेते हैं, लेकिन अपने जीवन की कठिनाइयों के लिए समाज को दोषी ठहराते हैं। लेकिन जब किसी व्यक्ति का हृदय उदार होता है और वह भारतीय मूल्यों से प्रेरित होता है, तो वह समाज के सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करता है और समाज को अपनी सफलता में समान भागीदार मानता है। कोविंद जी की आत्मकथा और उसका शीर्षक इसका उदाहरण हैं।‘

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