हरियाणा सरकार द्वारा राजस्व सेवाओं को और अधिक पारदर्शी, सरल व नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ऑटो म्यूटेशन प्रणाली तथा पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 को लागू किया जा रहा है, जिससे भूमि संबंधी कार्यों में तेजी आएगी और आम नागरिकों को राहत मिलेगी।
पहले रजिस्ट्री होने के बाद भी कई मामलों में इंतकाल दर्ज होने में देरी होती थी। विभाग ने ऐसे मामलों की पहचान की, जिनमें रजिस्ट्री के बावजूद इंतकाल दर्ज नहीं हुआ था। इसके समाधान के लिए ऑटो म्यूटेशन प्रणाली को एक माह तक पायलट आधार पर चलाया गया और सुझावों के आधार पर इसे और प्रभावी बनाया गया। प्रारंभिक चरण में करीब 50 हजार इंतकाल स्वत: दर्ज किए जा चुके हैं।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री होते ही स्वत: इंतकाल दर्ज हो जाएगा तथा रजिस्ट्री के समय ही इंतकाल नंबर उपलब्ध हो जाएगा। जिन मामलों में खेवट विभाजन की आवश्यकता नहीं होगी, उनमें 24 घंटे के भीतर इंतकाल स्वीकृत हो जाएगा, जबकि खेवट विभाजन वाले मामलों का निपटान अधिकतम 10 दिनों में किया जाएगा।
विरासत, पारिवारिक बंटवारे तथा न्यायालय की डिक्री आधारित इंतकाल भी अधिकतम 10 दिनों में निपटाए जाएंगे। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन एवं पारदर्शी होगी। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर सभी लंबित इंतकालों का निपटान किया जाएगा तथा आगामी 15 दिनों के भीतर शेष लंबित मामलों के समाधान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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उन्होंने बताया कि ऑटो म्यूटेशन प्रणाली लागू होने से नागरिकों को अलग से इंतकाल के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। रजिस्ट्री और इंतकाल की प्रक्रिया आपस में जुड़ जाएगी, जिससे तहसील कार्यालयों के चक्कर कम लगेंगे। नागरिक अपने इंतकाल की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे तथा उसकी प्रति डाउनलोड और प्रिंट भी कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा 29 सितंबर 2025 को बाबैन, कुरुक्षेत्र से पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 1.0 की शुरुआत की गई थी। लगभग आठ माह के सफल संचालन और प्राप्त सुझावों के आधार पर अब पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 लागू किया जा रहा है। नई प्रणाली में आवेदन फॉर्म को सरल बनाया गया है तथा प्रथम और द्वितीय पक्ष की आधार आधारित ई-केवाईसी अनिवार्य की गई है। कंपनियों एवं एनआरआई को अधिकृत व्यक्ति नियुक्त करने की सुविधा दी गई है। डीड को नागरिक स्वयं, डीड राइटर, अधिवक्ता अथवा हेल्पडेस्क के माध्यम से भर सकेंगे। इसके अलावा पूर्ण डिजिटल हस्ताक्षर एवं बायोमेट्रिक प्रक्रिया, ऑनलाइन स्टे सत्यापन, अतिरिक्त दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन तथा अपॉइंटमेंट को तत्काल श्रेणी में परिवर्तित करने जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान प्रणाली में अलग-अलग स्तरों पर किए जाने वाले आरसी-1 एवं आरसी-2 कार्यों को एकीकृत कर दिया गया है, जिससे अनावश्यक प्रक्रियाओं में कमी आएगी। साथ ही रजिस्ट्री में शामिल प्रत्येक पक्षकार की व्यक्तिगत फोटो के माध्यम से पहचान सुनिश्चित की जाएगी, जिससे फर्जीवाड़े पर प्रभावी रोक लगेगी।