मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा बागवानी नर्सरी अधिनियम, 2025 (2025 का हरियाणा अधिनियम संख्या 17) की धारा 22(1) के तहत हरियाणा बागवानी नर्सरी नियम, 2026 को मंजूरी दी गई।
नए स्वीकृत हरियाणा बागवानी नर्सरी नियम, 2026 राज्य में बागवानी नर्सरियों के प्रबंधन और निगरानी के लिए एक पूर्ण नियामक प्रणाली प्रदान करते हैं।
ये नियम नर्सरी लाइसेंस के आवेदन, अनुदान, नवीनीकरण और श्रेणियों को जोड़ने की प्रक्रिया को निर्दिष्ट करते हैं। वे न्यूनतम नर्सरी मानकों, रिकॉर्ड रखने और बेची जाने वाली रोपण सामग्री के क्यूआर-आधारित प्रकटीकरण को भी परिभाषित करते हैं।
यह नियम फलदार पौधों, सब्जियों, कंद, मसालों, सीज़निंग, फूलों, सजावटी पौधों, औषधीय और सुगंधित फसलों, तथा सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से बागवानी पौधों के रूप में घोषित किए जाने वाले अन्य पौधों से संबंधित बागवानी नर्सरियों पर लागू होंगे। इन नियमों का उद्देश्य प्रदेश में सभी प्रमुख बागवानी फसलों के लिए गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री का उत्पादन और उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
किसानों को अपनी किस्म के अच्छी गुणवता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। ये पौधे बीमारी और कृमि से मुक्त होंगे। अगर विक्रेता (नर्सरी संचालक) खरीदार को खराब क्वालिटी, घटिया निम्न गुणवता वाले पौधे बेचता है, तो किसानों को खेती की लागत से दोगुना मुआवजा देने का प्रावधान है।
नियमों में नर्सरियों के नियमित निरीक्षण, लाइसेंस निलंबन या रद्दीकरण सहित उल्लंघन के मामले में कार्रवाई और कीटों व बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए संक्रमित या अवैध रोपण स्टॉक को अनिवार्य रूप से नष्ट करने का भी प्रावधान है। इसके अलावा शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए एक समयबद्ध अपील प्रणाली का प्रस्ताव किया गया है।
अधिनियम को लागू करने, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने, नर्सरी संचालन में जवाबदेही बनाए रखने, पौधों के माध्यम से कीट-जनित बीमारियों के प्रसार को रोकने और किसानों व खरीदारों के हितों की रक्षा करने के लिए ये नियम अति आवश्यक हैं।