Floating Solar Panel: आज के समय में बिजली बिल को कम करने और बिजली पैदा करने के लिए सोलर पैनल का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन अब सोलर एनर्जी के क्षेत्र में एक नई तकनीक जुड़ गई है, जिससे पानी बचाने में मदद मिल सकती हैं। दरअसल, पानी की सप्लाई को बचाने के लिए एक नए तरह का फ्लोटिंग सोलर पैनल बनाया गया है।
इस नई तकनीक को फ्लोटिंग सोलर पैनल या फ्लोटिंग फोटोवोल्टिक (FPV) सिस्टम का नाम दिया गया है, जिसे बांधों और जलाशयों में लगाया जा सकता हैं। ये तकनीक जमीन की कमी वाले देशों और पानी की कमी से जूझ रहे इलाकों को फायदा पहुंचा सकती है।
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फ्लोटिंग सोलर पैनल कैसे काम करेगा?
फ्लोटिंग सोलर प्लांट सामान्य सोलर पैनलों की तरह ही काम करते हैं। लेकिन एक चीज ऐसी है, जो इसे सबसे अलग बनाती है और वो है इसकी संरचना। इसे मजबूत प्लास्टिक पोंटून द्वारा डिजाइन किया गया है, जिससे ये पानी में आसानी से तैर सकते हैं। ये पानी की सतह को ढककर वाष्पीकरण होने से रोकेंगे और साथ ही, बिजली सप्लाई का काम भी सुचारू रूप से करेंगे, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।
फिलहाल, ये तकनीक ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े फ्लोटिंग सोलर पैनल सिस्टम में से एक है।, जहां पानी की कमी के संकट गहराया हुआ है। यह सिस्टम दक्षिणी विक्टोरिया के वॉर्नम्बूल में ब्रायर्ली बेसिन में लगाया गया है। यह सिस्टम न सिर्फ आसमान से सीधी धूप लेते हैं, बल्कि नीचे पानी की सतह से टकराकर आने वाली धूप को भी सोखने का काम करते हैं। इसने प्रदूषण फैलाने वाली गैसों को कम किया है।
इस सिस्टम से ज्यादा बिजली उत्पादन में भी मदद मिल रही है। साथ ही, इस पैनल से बहुत सारा पानी भी बच रहा है, जिससे पानी की बचत होती है। ये पैनल जलाशय, झील में लगाए जाते हैं, यानी किसी भी तरह की जमीन पर कब्जा नहीं किया जाता।