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Success Story: जेब खाली और आंखों में बड़ा सपना, चाय बेचने वाला लड़का बना IAS अफसर

Success Story: जेब खाली और आंखों में बड़ा सपना, चाय बेचने वाला लड़का बना IAS अफसर

Success Story: UPSC देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों युवा इसकी तैयारी करते हैं लेकिन कुछ चुनिंदा युवा ही इसमें सफल हो पाते हैं। कुछ युवा कई प्रयासों के बाद भी परीक्षा पास करने में असफल हो जाते हैं, लेकिन कुछ होनहार युवा पहले ही प्रयास में यूपीएससी पास कर सफलता प्राप्त कर लेते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी कहानी आपको अंदर तक मोटिवेट कर देगी।

बिना कोचिंग क्रैक की UPSC

हम बात कर रहे हैं IAS अफसर हिमांशु गुप्ता की। जी हां...ये एक ऐसा लड़का, जो स्कूल से लौटकर पिता की चाय की दुकान पर चाय बेचता, बर्तन साफ करता और वहीं बैठकर अखबार पढ़ा करता था, उसी लड़के ने बिना महंगी कोचिंग के UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर ली। आज उनकी कहानी लाखों युवाओं के लिए उम्मीद बन चुकी है।

घर में गरीबी लेकिन सपना बड़ा

हिमांशु गुप्ता का बचपन बेहद साधारण माहौल में बीता. उनकी फैमिली बेहतर जिंदगी की तलाश में उत्तराखंड से बरेली आया था. यहां उनके पिता ने छोटी सी चाय की दुकान शुरू की. घर की हालत ऐसी थी कि हर खर्च सोच-समझकर करना पड़ता था. कई बार जरूरी चीजों के लिए भी पैसे नहीं होते थे, लेकिन इन मुश्किलों के बीच हिमांशु ने हार मानने के बजाय बड़ा सपना देखना शुरू किया.

स्कूल खत्म होने के बाद वे सीधे दुकान पर पहुंच जाते थे. कभी चाय सर्व करते, कभी बर्तन धोते और कभी ग्राहकों की बातें सुनते. इसी दुकान के एक कोने में बैठकर उन्होंने दुनिया को समझना शुरू किया.

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अखबारों से शुरू हुई IAS की तैयारी

बहुत से लोग सोचते हैं कि सफलता सिर्फ बड़े शहरों और महंगी कोचिंग में मिलती है, लेकिन हिमांशु ने इंटरनेट, लाइब्रेरी और पुरानी किताबों के दम पर खुद को तैयार किया. चाय की दुकान पर आने वाले अखबार उनके लिए किसी क्लासरूम से कम नहीं थे. उसी से उनका जनरल नॉलेज स्ट्रॉन्ग हुआ और देश-दुनिया को समझने में मदद मिली.

दिल्ली यूनिवर्सिटी में लिया दाखिला

पढ़ाई में शानदार परफॉर्म करने के बाद हिमांशु का एडमिशन दिल्ली यूनिवर्सिटी के फेमस हिंदू कॉलेज में हो गया, लेकिन दिल्ली पहुंचने के बाद असली संघर्ष शुरू हुआ. नई जगह, नए लोग, नई भाषा, नया माहौल और पैसों की कमी, सबकुछ काफी चुनौती वाला था. इंग्लिश बोलने में दिक्कत होती थी, रहने और पढ़ाई का खर्च निकालना भी मुश्किल था. ऐसे में उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर खर्च निकालना शुरू किया और स्कॉलरशिप भी ली. इस तरह उन्होंने धीरे-धीरे खुद को मजबूत बनाया.

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बिना कोचिंग क्रैक किया UPSC

हिमांशु ने UPSC की तैयारी के लिए किसी बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट की हेल्प नहीं ली. उन्होंने खुद नोट्स बनाए, लाइब्रेरी में घंटों पढ़ाई की, इंटरनेट से मटेरियल जमा किए और लगातार पुराने पेपर्स सॉल्व किए. पहले ही अटेम्प्ट में उनका सेलेक्शन IRTS में हुआ, लेकिन उन्होंने दोबारा फिर परीक्षा और इस बार IPS बने, लेकिन उनका सपना IAS बनना था. आखिरकार तीसरे प्रयास में उन्होंने UPSC क्लियर कर IAS अफसर बनने का सपना पूरा कर लिया.

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