
भारत के महान बल्लेबाज और पूर्व कप्तान सचिन तेंदुलकर का मानना है कि सफलता का कोई शॉटकट नहीं होता। व्यक्ति को अपने सपने पाने के लिए वास्तव में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
सचिन ने एक स्कूल के बच्चों से बातचीत करते हुए अपने करियर में तमाम निकटजनों के योगदान के बारे में भी बात की और सचिन ने मराठी में बच्चों से बात करते हुए कहा, "जब मैं स्टूडेंट था, तब मेरे दिमाग में केवल एक ही बात थी कि मैं भारत के लिए खेलूं मेरे सफर की शुरुआत 11 साल की उम्र से हुई थी।" वे शुरू से ही सफल नहीं होते गए थे।पश्चिम महाराष्ट्र के एक स्कूल में बच्चों से बात करते हुए सचिन ने कल इस बात का खुलासा भी किया वे अपने पहले ट्रायल में चयन नहीं हुए थे।
अपने पहले ट्रायल के बारे में बात करते हुए सचिन ने कहा, "मुझे यहां तक याद है कि जब मैं अपने पहले चयन के ट्रायल के लिए गया था तब चयनकर्ताओं ने मुझे नहीं चुना। उन्होंने कहा मुझे कड़ी मेहनत करनी होगी और अपने खेल में सुधार लाना होगा। उस समय मैं निराश हो गया था क्योंकि मुझे लगा था कि मैंने बढ़िया बल्लेबाजी की लेकिन नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और मेरा चयन नहीं हुआ।"
तेंदुलकर ने अपने करियर में 200 टेस्ट, 463 वनडे खेले हैं जिनमें 15921 और 18426 रन बनाए हैं। सचिन ने कहा, "उसके बाद मैंने मेरी एकाग्रता, दृढ़ निश्चय, और कड़ी मेहनत की क्षमता बढ़ गई अगर आप अपने सपने पूरे करना चाहते हैं तो शॉर्टकट मदद नहीं करेंगे। उन्होंने अपने लंबे करियर के लिए अपने परिवार और बचपन के कोच रमाकांत आचरेकर के योगदान को अहम बताया।
सचिन ने अपने परिवार के योगदान के बारे में कहा, "क्रिकेट में मेरी सफलता का श्रेय मेहरे परिवार, उसके सभी सदस्यों को जाता है। मेरे माता पिता, मेरे भाई अजीत और नितिन जो मेरे सहयोग के लिए आगे नहीं आते, लेकिन फिर उन्होंने मेरा समर्थन किया। मेरी बड़ी बहन, जो अब शादी के बाद पूणे में रहती है, ने भी बहुत साथ दिया वास्तव में उसी ने मुझे जीवन का पहला क्रिेकेट बैट दिया था।"
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