
Delhi News: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि उनकी सरकार दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को प्रभावी रूप से नियंत्रित करने के लिए 12महीने, सातों दिन काम कर रही है। इसके लिए अल्प व दीर्घकालीन विस्तृत योजनाएं बनाकर उन्हें प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लंबी है इसलिए सभी निकाय भी पूरी रणनीति बनाकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण के खिलाफ इस लड़ाई में केंद्र सरकार का मार्गदर्शन व सहयोग भी मिल रहा है, इसलिए वायु प्रदूषण की चुनौती से निर्णायक रूप से निपटने के लिए व्यापक व समयबद्ध योजना पर कार्य चल रहा है। इस प्रयास से प्रदूषण में सुधार होगा और लोगों के स्वास्थ्य की भी रक्षा होगी।
मुख्यमंत्री ने दिल्ली सचिवालय में वायु प्रदूषण के नियंत्रण को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, मनजिंदर सिंह सिरसा, डॉ. पंकज कुमार सिंह, मुख्य सचिव राजीव वर्मा सहित डीडीए, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, दिल्ली नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, पर्यावरण विभाग, उद्योग, परिवहन व अधिकतर विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी विभाग प्रमुखों से प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए बनाए गए ब्लू प्रिंट के हिसाब से प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए और कहा कि इन्हें समयबद्ध क्रियान्वित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण पर प्रभावी रूप से नियंत्रण पाने के लिए दिल्ली सरकार को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीऔर केंद्र सरकार का मार्गदर्शन लगातार मिल रहा है। दोनों सरकारें चाहती हैं कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जाए, इसलिए न तो कोई अड़चन है और न ही बजट की कमी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार चार वर्षों की अवधि में वायु प्रदूषण (PM 2.5) के स्तर में पर्याप्त कमी लाने के लिए एक स्पष्ट, मापने योग्य और परिणाम-उन्मुख कार्य योजना पर कार्य कर रही है, जिसका विस्तृत विवरण विभागों के अनुसार इस प्रकार है:
14,000बसों का लक्ष्य और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी
दिल्ली की योजना अपने कुल बस बेड़े को 31दिसंबर 2026तक 6,000बसों, 31दिसंबर 2027तक 7,500बसों, 31मार्च 2028तक 10,400बसों और 31मार्च 2029तक 14,000बसों तक बढ़ाने की है। इन 14,000बसों की निर्धारित योजना में 7मीटर लंबाई की 500बसें शामिल हैं, जो ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ (अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी) को मजबूत करने के लिए तैनात की जाएंगी। इन बसों को दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के साथ सहजता से एकीकृत किया जाएगा ताकि आवासीय, वाणिज्यिक और उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की गहरी पहुंच सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में 100इलेक्ट्रिक मेट्रो फीडर बसों की तैनाती के माध्यम से लास्ट-माइल कनेक्टिविटी प्रदान की जा रही है। 31जनवरी 2026तक 10प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर ई-ऑटो, बाइक टैक्सी और फीडर कैब के पायलट एकीकरण को निष्पादित करने की योजना है।
ईवी पॉलिसी 2.0: दोपहिया और कमर्शियल वाहनों पर जोर
नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत दिल्ली के 58लाख दोपहिया वाहनों को मुख्य रूप से लक्षित किया जा रहा है, जिसमें सब्सिडी और स्क्रैपिंग प्रोत्साहन शामिल हैं। सार्वजनिक चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग पॉइंट्स की संख्या को मौजूदा 9,000से बढ़ाकर 36,000करने का लक्ष्य रखा गया है। कमर्शियल ट्रकों और तिपहिया वाहनों के लिए ब्याज सबवेंशन और केंद्र की ‘पीएम ई-ड्राइव’ योजना का लाभ उठाया जा रहा है, ताकि स्वच्छ ईंधन की ओर बढ़ सकें।
62भीड़भाड़ वाले बिंदुओं पर एक्शन
ट्रैफिक जाम से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए 62 ‘कंजेशन पॉइंट्स’ की पहचान की गई है, जिनमें से 30पर तत्काल सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है। ट्रैफिक प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए दिल्ली सरकार ने डीटीसी से 1,200अतिरिक्त कर्मी ट्रैफिक पुलिस को उपलब्ध कराए हैं।
दिल्ली मेट्रो, RRTS और सार्वजनिक परिवहन
आधारित परिवहन प्रणाली को प्रदूषण कम करने का मुख्य आधार माना गया है। वर्तमान में दिल्ली मेट्रो का 395किमी का नेटवर्क प्रतिदिन 65-70लाख यात्रियों को सेवा दे रहा है, जिसे फेज-4के 110किमी और फेज-5ए व 5बी के 96किमी के साथ और विस्तार दिया जा रहा है। फेज-4के पूरा होने से यात्रियों की संख्या दोगुनी होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, अगले चार वर्षों में एनसीआरटीसी (NCRTC) का कुल नेटवर्क 323किमी तक पहुंचाया जाएगा।
बड़े पैमाने पर सड़क पुनर्विकास और बुनियादी ढांचा आधुनिकीकरण
दिल्ली सरकार ने व्यापक सड़क सुधार कार्यों के लिए 6,000करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई है। दिल्ली में कुल लगभग 3,300किमी सड़क की लंबाई को फिर से बनाने या सुधारने की आवश्यकता है, इस 3,300किमी में पीडब्ल्यूडी की 800किमी सड़कें, नगर निगम की 1,200किमी सड़कें और अनधिकृत कॉलोनियों की 1,000किमी सड़कें शामिल हैं। योजना के तहत सड़कों के किनारों और सेंट्रल वर्ज (बीच का हिस्सा) का पूर्ण पक्कीकरण (paving) और हरियाली शामिल होगी। बार-बार सड़क काटने से रोकने के लिए भूमिगत यूटिलिटी डक्ट्स का प्रावधान भी किया जाएगा। एक वर्ष के भीतर काम पूरा करने के लक्ष्य के साथ दो महीने के भीतर निविदाएं जारी की जा रही हैं।
मशीनीकरण और प्रौद्योगिकी के माध्यम से सड़क की धूल का प्रबंधन
सड़क की धूल, जो प्रदूषण में प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक है, इससे निपटने के लिए बड़े पैमाने पर मशीनीकृत सड़क सफाई और धूल दबाने के उपाय लागू किए जा रहे हैं। सड़कों से धूल और मलबे को कुशलतापूर्वक हटाने के लिए मशीनों और स्प्रिंकलर का उपयोग किया जा रहा है, जिससे हवा में प्रदूषित तत्वों को रोकने और शहर में समग्र पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य स्थितियों में सुधार करने में मदद मिलती है। वर्तमान में, एमसीडी, एनडीएमसी, डीएसआईआईडीसी और एनएचएआई सहित सड़क-स्वामित्व वाली एजेंसियों द्वारा 76मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें (एमआरएसएम) तैनात की गई हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत 14अतिरिक्त मशीनें 31जनवरी, 2026तक एमसीडी द्वारा तैनात की जाएंगी। संकरी सड़कों (60फीट से कम चौड़ी सड़कों) पर कवरेज बढ़ाने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा 70अतिरिक्त एमआरएसएम मशीनों की तैनाती को मंजूरी दी गई है। यह पहल 2,300करोड़ रुपये की परियोजना का हिस्सा है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी की सड़कों के लिए दो और प्रमुख परियोजनाएं लागू कर रही है। इनमें व्यापक मशीनीकृत सफाई और प्रभावी धूल नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए विभाग की सड़कों पर 70एमआरएसएम मशीनों के साथ-साथ 140लिटर पिकर, डस्ट डंपर और वॉटर टैंकर तैनात करेगी। यह परियोजना 2,000करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ 10-वर्षीय OPEX मॉडल पर लागू की जाएगी। दूसरी योजना के तहत प्रमुख सड़कों और गलियारों पर नियमित धूल दमन के लिए पूरे शहर में 250वॉटर स्प्रिंकलर-कम-एंटी-डस्ट मशीनों का एक बेड़ा तैनात किया जाएगा। यह परियोजना भी 2,000करोड़ रुपये के अनुमोदित वित्तीय परिव्यय के साथ 10-वर्षीय OPEX मॉडल पर निष्पादित की जाएगी।
दिल्ली नगर निगम लैंडफिल साइटों की सफाई
पुराने कचरे (Legacy Waste) को खत्म करने के लिए सख्त समय सीमा तय की गई है, जैसे ओखला लैंडफिल: जुलाई 2026तक, भलस्वा लैंडफिल: अक्टूबर 2026तक और गाजीपुर लैंडफिल दिसंबर 2027तक। दिल्ली सरकार ने कचरा प्रबंधन के लिए एमसीडी को चालू वित्त वर्ष में 500करोड़ रुपये और भविष्य में 300करोड़ रुपये सालाना देने की घोषणा की है।
औद्योगिक प्रदूषण से ऐसे मिलेगी मुक्ति
औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाते हुए अब तक 1,000से अधिक प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को सील किया गया है। बड़े उद्योगों को रीयल-टाइम प्रदूषण निगरानी के लिए ‘ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम’ (OCEMS) लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
35लाख नए पौधे और रिज का पुनरुद्धार
हरियाली बढ़ाने के लिए अगले 4साल में ‘दिल्ली रिज’ क्षेत्र में 35लाख पेड़ लगाए जाएंगे, जिनमें से 14लाख पेड़ इसी साल लगाए जाने का लक्ष्य है। इसके अलावा 365एकड़ ‘ब्राउन पार्क’ क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा।
बायोमास और निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन
निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए तेहखंड में नया प्रोसेसिंग प्लांट शुरू किया जा रहा है। साथ ही, सर्दियों में कचरा जलाने से रोकने के लिए 15,500इलेक्ट्रिक हीटर बांटे जा रहे हैं ताकि लोगों को हीटिंग के लिए बायोमास न जलाना पड़े।
स्मार्ट पार्किंग प्रबंधन
बढ़ते वाहनों और ट्रैफिक दबाव को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार ने स्मार्ट पार्किंग प्रबंधन को प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है। सरकार का मानना है कि मौजूदा पार्किंग सुविधाएं अपर्याप्त हैं और जीरो पार्किंग जोन और निर्धारित सड़क किनारे पार्किंग नियमों के प्रभावी प्रवर्तन की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर पार्किंग अवसंरचना के विस्तार की योजना बनाई गई है, जिसमें स्मार्ट प्राइसिंग व्यवस्था लागू की जाएगी। यह व्यवस्था भीड़भाड़ वाले इलाकों में निजी वाहनों के अत्यधिक उपयोग को हतोत्साहित करेगी और लोगों को सार्वजनिक व साझा परिवहन अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। भूमि की कमी को देखते हुए वाणिज्यिक क्षेत्रों, ट्रांजिट-ओरिएंटेड जोन और अधिक आवागमन वाले स्थानों पर मल्टी-लेवल पार्किंग सुविधाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।
प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्त निगरानी और एएनपीआर प्रणाली
वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कड़े प्रवर्तन उपाय लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत विशेष प्रवर्तन और पंजीकरण अभियान शुरू किए जा रहे हैं। साथ ही, दिल्ली की सीमाओं पर प्रवेश बिंदुओं पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की स्वतः पहचान कर उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा सके।
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