जुम्बा डांस पर केरल में बवाल! मुस्लिम संगठनों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

जुम्बा डांस पर केरल में बवाल! मुस्लिम संगठनों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

Jumba Dance Controversy Kerala: साल 2011 की जनगणना के आकंड़ों को देखे तो केरल देश का सबसे साक्षर राज्य है। लेकिन देश के सबसे अधिक पढ़े-लिखे लोगों वाले राज्यों से एक ऐसी खबर सामने आई, जिसने लोगों को अंचभित कर दिया। दरअसल, केरल सरकार ड्रग्स के खिलाफ बड़ा अभियान चला रही है। जिसके तहत स्कूलों में जुम्बा क्लासेस दिया जा रहा है। जुम्बा, डांस का एक फॉर्म होता है, जिसे फिटनेस वर्कआउट के तौर पर जाना जाता है। लेकिन जैसे ही इस जुम्बा क्लास की तस्वीर सामने आई वैसे ही सूबे के कई मुस्लिम समूहों ने इसका विरोध करना शुरु कर दिया। मुस्लिम समूहों ने इसे इस्लाम से जोड़ कर विरोध किया है। हालांकि, इस मुद्दे पर केरल के तमाम राजनीतिक दल एकजुट नजर आ रहे हैं।

मुस्लिम संगठनों को क्या दिक्कत?

चंद दिनों ही पहले केरल के शिक्षा विभाग ने नशा विरोधी अभियान के तहत स्कूलों में जुम्बा क्लासेस शुरु की थी। लेकिन अब इसका विरोध इस्लमिक सगंठनों ने शुरु कर दिया है। इस्लामिक संगठनों का तर्क है कि लड़के-लड़कियों का एकसाथ नाचना, वो भी एकसाथ बिल्कुल स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। विजडम इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन' के महासचिव और टीचर टी. के. अशरफ ने फेसबुक पर लिखा, 'मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता और न ही मैं और मेरा बेटा इन सेशन्स में भाग लेंगे।‘सूबे के एक प्रमुख मुस्लिम संगठन समस्ता के नेता नसर फैज़ी कूड़ाथाय ने कहा, 'केरल सरकार ने स्कूलों में जुम्बा डांस लागू किया है। जुम्बा एक ऐसा डांस है जिसमें कम कपड़ों में एकसाथ डांस किया जाता है।अगर सरकार ने इसे बड़े बच्चों के लिए भी अनिवार्य किया है, तो यह आपत्तिजनक होगा।मौजूदा शारीरिक शिक्षा को सुधारने के बजाय अश्लीलता थोपना ठीक नहीं। यह उन छात्रों की निजी स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, जिनका मॉरल सेंस उन्हें इस तरह गुस्सा निकालने और साथ नाचने की इजाजत नहीं देता।'

सरकार ने क्या कहा?

सरकार ने मुस्लिम सगंठनों की आपत्ति को जहर के समान बताया है। केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें कुछ लड़कियां हिजाब पहनकर जुम्बा कर रही हैं। साथ ही उन्होंने लिखा, 'बच्चों को खेलने, हंसने, मस्ती करने और स्वस्थ रूप से बड़ा होने दो।'ऐसी आपत्तियां समाज में उस जहर से भी ज्यादा खतरनाक जहर घोलेंगी जो नशे से फैलता है। कोई भी बच्चों को कम कपड़े पहनने के लिए नहीं कह रहा है। बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में ही ये एक्टिविटी कर रहे हैं। केरल जैसे समाज में, जहां लोग सामूहिक सौहार्द से रहते हैं, ऐसी आपत्तियां बहुसंख्यक सांप्रदायिकता को बढ़ावा देंगी।'

भाजपा भी विरोध में उतरी

मुस्लिम सगंठनों के द्वारा जारी किए गए फतवें पर भाजपा भी मुखर हो गई है। भाजपा नेता वी. मुरलीधरन ने कहा, 'किसी धार्मिक संगठन की ओर से जारी किया गया फतवा, यह तय करने का मापदंड नहीं होना चाहिए कि एजुकेशन डिपार्टमेंट जुम्बा के पक्ष में है या विरोध में। सरकार को आम जनता के विचारों और छात्रों के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए।'उन्होंने आगे कहा, 'क्या मदरसा यह तय करेगा कि स्कूल की टाइमिंग क्या होगी? हमें ऐसे लोगों को हर चीज धर्म के आधार पर मांगने का अनावश्यक अवसर नहीं देना चाहिए।‘

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