Somvati Amavasya Vrat Katha: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है। लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस साल अमावस्या तिथि 14 जून 2026 दोपहर लगभग 12:20 बजे शुरू होकर 15 जून सुबह 8:24 बजे तक रहेगी। ऐसे में के आधार पर 15 जून सोमवार को यह व्रत और पूजा-अनुष्ठान मनाए जाएंगे यह दिन पितरों की शांति, पितृदोष से मुक्ति को मान्यता देते हुए 15 जून सोमवार को व्रत और पूजा-अनुष्ठान किया जाएगा।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए व्रत रखती हैं। यह दिन पितरों की शांति, पितृदोष से मुक्ति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दिन पितर तर्पण, स्नान-दान और पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है।
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सोमवती अमावस्या व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मण परिवार था। परिवार में पति-पत्नी और उनकी एक पुत्री थी, जो बहुत सुंदर और गुणवान थी। लेकिन गरीब होने की वजह से उसका विवाह नहीं हो पा रहा था। उस दौरान एक साधु ने बताया कि उनकी पुत्री के हाथ में विवाह योग्य रेखा नहीं है। इसलिए वैधव्य योग से मुक्ति के लिए एक पति-परायण धोबिन (सोना) की सेवा करनी होगी। इसके बदले में वो महिला इसकी शादी में अपनी मांग का सिंदूर इसे लगा दें और इसके बाद इस कन्या का विवाह हो जाए।
साधु के कहने पर कन्या रोज सुबह धोबिन के घर जाकर चुपके से साफ-सफाई और घरेलू काम करती। एक दिन सोना धोबिन ने उसे पकड़ लिया और कन्या की बात सुनकर अपनी मांग का सिंदूर उसे लगाया। ठीक उसी समय धोबिन के पति की मृत्यु हो गई। निराहार धोबिन रास्ते में पीपल वृक्ष के पास पहुंची। उस दिन सोमवती अमावस्या थी। उसने ईंटों के टुकड़ों से ही 108 बार भंवरी दी, 108 परिक्रमा की और जल ग्रहण किया। इससे उसके पति को पुनः जीवन मिल गया।
शाम को दीपदान करना जरूरी
धार्मिक दृष्टि से इस दिन शाम के समय पीपल पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इससे को मार्गदर्शन मिलता है और उनके आशीर्वाद से घर में सुख-समृद्धि आती है। दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मकता का संचार होता है।