Dhanteras Chaumukhi Diya: हिंदू धर्म में सभी तीज-त्योहार बड़े ही धूमधाम से बनाए जाते है। इन्हीं में से एक प्रमुख त्योहार है दीपावली, जिसकी शुरूआत धनतेरस के पावन पर्व से होती है, जो कल 06 नवंबर 2026 शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन माता लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। साथ ही, इस दिन सोना और नई धातु की वस्तुएं खरीदना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके अलावा इस दिन चौमुखी दीया (जिसे यम दीपक भी कहते है) जलाने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चौमुखी दीया जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धनतेरस के दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर चौमुखी दीया जलाया जाता है। और परिवार की अच्छी सेहत और सुरक्षा की कामना की जाती है। ऐसा करने से घर मे सुख-शांति और सकारात्मकता का वास होता है। लेकिन क्या आप जानते है चौमुखी दीया जलाने से क्या होता है और किस तरह जलाने चाहिए। अगर नहीं तो चलिए जानते है।
धनतेरस पर्व की तिथि
हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल ये त्योहार कल 06 नवंबर को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि का आरंभ 06 नवंबर की सुबह करीब 10:30 बजे होगा, जिसका समापन अगले दिन 07 नवंबर की सुबह लगभग 10:47 बजे होगा। हिंदू धर्म में उदया तिथि का महत्व है, इसलिए धनतेरस का पर्व 06 नवंबर को ही मनाया जाएगा।
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धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 06:02 बजे से 07:57 बजे तक रहेगा
प्रदोष काल मुहूर्त: शाम करीब 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा
वृषभ काल: शाम 06:02 बजे से 07:57 बजे तक रहेगा
क्यों जलाया जाता है चौमुखी दीया?
धार्मिक मान्यताओं की मानें तो धनतेरस के दिन शाम को चौमुखी दीया जलाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, जिसे यम दीपक भी कहा जाता है। इस दीपक को जलाने का उद्देश्य परिवार की सुरक्षा और अकाल मृत्यु के भय से मुक्त रखना है। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है। बता दें, यमराज को मृत्यु और धर्म के देवता कहा जाता है। इसलिए धनतेरस के दिन यमराज को प्रसन्न करने के लिए यम दीपक जलाया जाता है। इससे यमराज परिवार को अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु का आशीर्वाद देते हैं।
कैसे जलाया जाता है चौमुखी दीया?
चौमुखी दीया जलाने के लिए चौमुखी (चार बत्तियों वाला) मिट्टी का दीपक लाएं। उसमें सरसों का तेल या तिल का तेल भरें और चार बत्तियां लगाएं। इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर पहले थोड़े-से चावल रखें, फिर उसके ऊपर चौमुखी दीया रखें। लेकिन ध्यान रहें कि यह विधि धनतेरस के दिन शाम को की जाती है।