
।Shri Dhuniwale Dadaji Darbar:आज फाल्गुन पूर्णिमा पर लग रहे पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान देशभर के अधिकांश मंदिरों में सूतक काल लागू होने से कपाट बंद रहेंगे और पूजा-पाठ स्थगित रहेगा, लेकिन मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित श्री दादाजी धूनीवाले मंदिर एक अनोखा मंदिर है। यहां चंद्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं माना जाता, इसलिए मंदिर के द्वार 24 घंटे खुले रहते हैं और पूजा-आरती, हवन तथा दर्शन अनवरत जारी रहते हैं।
चंद्र ग्रहण में भी खुलते है दादाजी धूनीवाले मंदिर के द्वार
यह मंदिर अवधूत संत दादाजी धूनीवाले की समाधि स्थल है, जहां अखंड धूनी (अग्नि कुंड) सदियों से जल रही है। मंदिर ट्रस्ट और 'केशव विनय' जैसी धार्मिक पुस्तकों के अनुसार, दादाजी अवधूत परंपरा के संत थे, जिन्होंने परमात्मा को सर्वोच्च मानकर सूर्य, चंद्र और नवग्रहों को अलग-अलग नहीं माना। उनकी मान्यता है कि जब सब कुछ परमात्मा का ही रूप है, तो ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाएं यहां नकारात्मक ऊर्जा नहीं फैला सकतीं। इसलिए ग्रहण काल में भी श्रद्धालु दादाजी की समाधि के दर्शन कर सकते हैं, अखंड हवन में आहुति दे सकते हैं और नियमित आरती में शामिल हो सकते हैं।
मंदिर के ट्रस्टी सुभाष नागोरी के अनुसार, आज के चंद्र ग्रहण (दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक) के दौरान भी मंदिर में कोई बदलाव नहीं होगा। यानी दर्शन, पूजन और हवन बिना रुके चलते रहेंगे। यह परंपरा दादाजी की शिक्षाओं पर आधारित है, जहां ग्रह-नक्षत्रों को परमात्मा से नीचे नहीं रखा जाता। इसी कारण यहां सूतक काल लागू नहीं होता और भक्तों को कोई प्रतिबंध नहीं झेलना पड़ता।
ग्रहण के दिन भी रहती हैं भीड़
खंडवा के इस मंदिर में रोजाना हजारों श्रद्धालु आते हैं, जो अखंड धूनी की ज्योति और दादाजी की कृपा से जुड़े चमत्कारों की कहानियां सुनाते हैं। ग्रहण के दिन यहां विशेष रूप से भीड़ बढ़ जाती है, क्योंकि लोग इस अनोखी परंपरा को देखने और भाग लेने आते हैं। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे शांति और व्यवस्था बनाए रखें, साथ ही ग्रहण के दौरान भी सकारात्मक ऊर्जा के साथ दर्शन करें।
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