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जलियांवाला बाग में आज भी गूंजती है शहीदों की कुर्बानी, परिवारों ने उठाई सम्मान की मांग

जलियांवाला बाग में आज भी गूंजती है शहीदों की कुर्बानी, परिवारों ने उठाई सम्मान की मांग

Punjab News: पंजाब के अमृतसर में आज भी लोग जलियांवाला बाग में शहीद हुए बेगुनाहों को श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं। इस दिन यहां जनरल डायर द्वारा किए गए नरसंहार की यादें फिर से ताजा हो जाती हैं। यहां शहीद हुए क्रांतिकारियों के परिवार आज भी इस दिन को काला दिन मानते हैं। उनका कहना है कि देश को आजाद हुए 77 साल से अधिक समय हो चुका हैलेकिन सरकारों की ओर से उन्हें अभी तक उचित सम्मान नहीं मिला। हर रोज हजारों की संख्या में पर्यटक अमृतसर पहुंचते हैं और जलियांवाला बाग में शहीदों को नमन करते हैं। 

13 अप्रैल 1919 के इस हत्याकांड में शहीद हुए लोगों को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। यहां आने वाले लोग श्रद्धांजलि देने के बाद अपने शहरों को लौटते समय यह संकल्प लेते हैं कि वे देश के लिए कुछ ऐसा करेंगे जिससे उन्हें हमेशा याद रखा जाए। जब कोई व्यक्ति जलियांवाला बाग में प्रवेश करता हैतो वह भयावह दिन आज भी आंखों के सामने आ जाता हैजब जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाने का आदेश दिया था। यहां की दीवारों पर आज भी गोलियों के निशानखून से भरा कुआं (शहीदी कुआं) और स्मारक उस दर्दनाक इतिहास की गवाही देते हैं। दूर-दूर से आने वाले पर्यटक यह सब देखने आते हैं और नई पीढ़ी को देशभक्ति और बलिदान के बारे में जानकारी मिलती है। जब कोई व्यक्ति इन निशानों को देखता हैतो आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं और वह समय मानो जीवंत हो उठता है। किताबों या फिल्मों के माध्यम से इस घटना का दर्द समझना कठिन हैलेकिन यहां आकर अंग्रेजों की क्रूरता सीधे महसूस होती है। 

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हर पर्यटक के मन में एक सवाल उठता है कि क्या ये कुर्बानियां व्यर्थ गईंआज हम आजादी का आनंद ले रहे हैं और खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं। शहीदों के परिवारों का कहना है कि वे यहां आकर प्रार्थना करते हैं ताकि शहीदों की आत्माओं को शांति मिल सके। परिवारिक सदस्यों सुनील कपूर और कमल पोद्दार ने बताया कि आज भी उस घटना के दृश्य उनकी आंखों के सामने आ जाते हैं और रूह कांप उठती है। उनका कहना है कि केंद्र और पंजाब सरकार की ओर से शहीद परिवारों के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने मांग की कि शहीद परिवारों को आधिकारिक दर्जा और उचित सम्मान दिया जाए। उन्होंने बताया कि रॉलेट एक्ट विरोध आंदोलन के दौरान हो रही जनसभा में जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवाईंजिससे कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए कुएं में छलांग लगा दी और शहीद हो गए। आज भी कुछ ही परिवार बचे हैं जो अपने शहीदों को मान-सम्मान दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकारें आती-जाती रहींलेकिन इस मुद्दे पर गंभीर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि शहीद परिवारों को उचित दर्जा और सम्मान दिया जाए।

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