
Bombay High Decision On Nude Painting: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शनिवार यानी 26अक्टूबर को न्यूड पेंटिंग मामले में सुनवाई की। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि, हर न्यूड तस्वीर को अश्लील नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि सेक्स और अश्लीलता में अंतर है। साथ ही कोर्ट ने कस्टम विभाग को जब्त की गई "न्यूड पेंटिंग" को रिलीज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कस्टम विभाग को 14दिन के अंदर सभी तस्वीरों को मालिक को सौंपने का आदेश दिया है।
कस्टम विभाग ने जब्त की थी पेंटिंग
बता दें कि, हाईकोर्ट ने कस्टम विभाग को मशहूर कलाकार एफएन सूजा और अकबर पद्मासी की पेंटिंग्स को वापस करने का आदेश दिया है। बता दें कि, ये मामला अप्रैल 2023का है। बिजनेसमैन मुस्तफा कराचीवाला की पोलीमेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने लंदन से 7पेंटिंग मुंबई लाई थी। इसके बाद कस्टम विभाग ने इन पेंटिंग को यह कहकर जब्त कर लिया था कि, ये पेंटिंग न्यूडिटी को बढ़ावा दे रही हैं।
मुस्तफा कराचीवाला ने दाखिल की थी याचिका
बता दें कि मुस्तफा कराचीवाला ने कस्टम विभाग के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने कहा था कि पेंटिंग को अश्लील कैसे माना जा सकता है? याचिकाकर्ता ने कहा था कि कला एक राष्ट्रीय खजाना है जिसे उचित मान्यता दी जानी चाहिए। वहीं, कोर्ट में कस्टम विभाग कला के महत्व को समझाने में विफल रहा। जिसके बाद मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने कहा कि "कस्टम विभाग ने केवल इस बात ध्यान दिया कि पेंटिंग्स न्यूड थी।
कोर्ट ने आगे कहा कि हर कोई ऐसी पेंटिंग को पसंद करे ये जरूरी भी नहीं है। सरकारी अधिकारी की व्यक्तिगत राय, पसंद और नापसंद किसी दूसरे पर थोपी नहीं जा सकती है।
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