Nepal Flood: नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। काठमांडू पोस्ट और सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 157 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 400 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में विदेशी नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। बाढ़ ने तीन जिलों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई और कई घरों, वाहनों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अपने साथ बहा लिया।
रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी इलाके में हिमस्खलन के कारण भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंडे का प्रवाह बाधित हुआ। इसके बाद जमा पानी और मलबे के तेजी से बहने से अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। पानी का तेज बहाव स्याफ्रुबेसी समेत आसपास की बस्तियों की ओर बढ़ा, जिससे लोगों को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। बताया गया है कि बाढ़ आने से पहले इलाके में बारिश नहीं हो रही थी। ऐसे में स्थानीय लोगों को अचानक आई बाढ़ के संबंध में पहले से कोई स्पष्ट चेतावनी नहीं मिल सकी।
सैकड़ों लोग लापता, विदेशी नागरिक भी शामिल
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के हवाले से बताया गया है कि लापता लोगों में 391 विदेशी नागरिक और 44 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों और राहत एजेंसियों की ओर से प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत अभियान चलाया जा रहा है।
बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी व्यापक नुकसान पहुंचाया है। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, नौ जलविद्युत परियोजनाएं और वाणिज्यिक बैंकों की नौ शाखाएं नष्ट हो गई हैं। इसके अलावा करीब 19 मोटर योग्य पुल और लगभग 40 किलोमीटर राजमार्ग भी बाढ़ की चपेट में आकर बह गए हैं। इससे प्रभावित इलाकों में संपर्क और राहत पहुंचाने की चुनौती और बढ़ गई है।
भारत ने शुरू की मानवीय सहायता
नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान के बीच भारत ने भी सहायता भेजी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत की मानवीय सहायता, आपदा राहत और चिकित्सा सामग्री काठमांडू पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि राहत कार्यों में सहयोग के लिए अतिरिक्त सहायता भी जुटाई जा रही है।
भारत की ओर से नेपाल के लिए करीब 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी गई है। भारतीय वायुसेना का C-130J विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा। इसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सौर लैंप और आवश्यक दवाओं समेत कई जरूरी सामान शामिल हैं।
हिम-जलाशय टूटने की भी आशंका
नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, हिमस्खलन के बाद मलबे से बनी झील या हिम-जलाशय के अचानक टूटने से भोटेकोशी नदी में फ्लैश फ्लड आई हो सकती है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने भी शुरुआती उपग्रह विश्लेषण के आधार पर नदी में अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई है।
हालांकि, NDRRMA की प्रवक्ता शांति महत ने कहा है कि आपदा के वास्तविक कारण को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि फिलहाल प्राथमिकता बचाव और राहत कार्यों पर है और घटना का कारण आगे स्पष्ट किया जाएगा।
नेपाल की बड़ी आपदाओं में शामिल हो सकती है घटना
बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने और व्यापक बुनियादी ढांचे के नुकसान को देखते हुए इस बाढ़ को नेपाल की आधुनिक इतिहास की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है। फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है तथा प्रशासन की नजर लापता लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों में जरूरी सहायता पहुंचाने पर है।