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डॉक्टरों से भरा परिवार...यूरोलॉजिस्ट बनने का है सपना, MP के आर्यमन सोलंकी ने NEET-UG में हासिल की AIR 46; बताया री-एग्जाम को फायदेमंद

डॉक्टरों से भरा परिवार...यूरोलॉजिस्ट बनने का है सपना, MP के आर्यमन सोलंकी ने NEET-UG में हासिल की AIR 46; बताया री-एग्जाम को फायदेमंद

Aryaman Solanki AIR 46: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने गुरुवार रात को NEET-UG 2026 की री-एग्जाम का रिजल्ट जारी कर दिया है। इस परीक्षा में कुल 11.21 लाख उम्मीदवार पास हुए हैं। बता दें, कथित पेपर लीक के कारण पिछली परीक्षा रद्द होने के बाद 21 जून को आयोजित पुन: परीक्षा में लगभग 20 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे।

इस बार री-एग्जाम का रिजल्ट उम्मीद से ज्यादा अच्छा आया है। लुधियाना के आर्यन गुप्ता ने AIR 1 प्राप्त किया, उसके बाद हरियाणा के पांशुल बंसल ने AIR 2 और राजस्थान के उपलक्ष्य गोयल ने AIR 3 प्राप्त किया। तो वहीं, मध्य प्रदेश के जबलपुर में रहने वाले आर्यमन सोलंकी ने AIR 46 रैंक हासिल की हैं। इस सफलता पर उन्होंने कहा कि पुनर्परीक्षा उनके लिए लाभकारी साबित हुई।

आर्यमन सोलंकी ने क्या कहा?

मीडिया चैनल से बात करते हुए आर्यमन सोलंकी ने कहा कि पहली परीक्षा रद्द होने के बाद वे शुरू में निराश थे, लेकिन बाद में उन्होंने उस स्थिति को स्वीकार किया और सारा ध्यान अपनी तैयारी पर लगाया। उन्होंने कहा ‘जब री-नीट की घोषणा हुई, तो माहौल काफी निराशाजनक और उदास था क्योंकि 3 मई को हुई NEET परीक्षा काफी अच्छी रही थी। लेकिन फिर मैंने सोचा कि NEET तो सभी 22 लाख बच्चों के लिए है, और शायद सही रैंक या क्षमता अभी सामने नहीं आई है। री-नीट सही फैसला था, और इसी वजह से मेरे अंकों और रैंक में काफी सुधार हुआ।‘

उन्होंने आगे कहा ‘जब मैंने पहली परीक्षा दी थी, परीक्षा खत्म होने के बाद मेरे अंक काफी अच्छे थे। लेकिन जैसे-जैसे दूसरे बच्चों के अंक आते गए, मेरी रैंक इतनी ऊंची नहीं होती जितनी इस बार है। मेरा मतलब है, थोड़ी कम होती। इसलिए री-नीट मेरे लिए काफी फायदेमंद साबित हुई।‘

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एग्जाम की तैयारी के बारे में बताया

पहली परीक्षा रद्द होने के बाद के समय को याद करते हुए, आर्यमन ने कहा कि उनके माता-पिता के सहयोग ने उन्हें दोबारा तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। अपनी पढ़ाई और तैयारी के तरीके के बारे में आर्यमन ने बताया कि उन्होंने अतिरिक्त तैयारी के दौरान पूरी एकाग्रता से पढ़ाई की और मुख्य रूप से प्रश्नों को हल करने और महत्वपूर्ण अवधारणाओं को दोहराने पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा ‘उस दौरान मैंने कोई नया विषय शुरू नहीं किया। मैंने भौतिकी और रसायन विज्ञान के प्रश्नों को हल करने पर ध्यान दिया। जीव विज्ञान में मैंने सिर्फ NCERT पढ़ी। कोचिंग संस्थान ने प्रश्न पत्र भी उपलब्ध कराए, और मैंने हर दिन पूरे पाठ्यक्रम की परीक्षा दी।‘

आर्यमन के पिता एक यूरोलॉजिस्ट हैं

अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए, आर्यमन ने कहा कि फिलहाल उनकी रुचि यूरोलॉजी (मूत्रविज्ञान) में है, लेकिन मेडिकल की पढ़ाई के दौरान वे अपने विकल्प खुले रखना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा ‘अभी तो मैं यूरोलॉजी में ही आगे बढ़ना चाहता हूं, लेकिन पढ़ाई के दौरान यह बदल भी सकता है। मैंने अपने विकल्प तय नहीं किए हैं। यह लचीला है। यूरोलॉजी मेरी स्वाभाविक पसंद है।‘ आर्यमन बताते है कि उनके पिता डॉ. फणींद्र सोलंकी भी खुद एक यूरोलॉजिस्ट हैं, जबकि उनकी मां डॉ. अनुपमा सोलंकी एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। लेकिन उन्होंने कभी भी इसके लिए दबाव नहीं डाला। वे हमेशा मुझे नए विकल्पों को तलाशते रहने और उभरते हुए अन्य क्षेत्रों को देखने के लिए कहते हैं।

आर्यमन के माता-पिता ने अपने बेटे की उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता उसे एक अच्छा इंसान और डॉक्टर बनते देखना है। उन्होंने कहा कि आर्यमन बचपन से ही एकाग्र और मेहनती छात्र रहा है। अपने बेटे के भविष्य के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा ‘वंशानुक्रम अभी दूर की बात है। अभी उसे एक अच्छा इंसान, एक अच्छा डॉक्टर बनना है और अपनी शिक्षा अच्छे से पूरी करनी है।‘उन्होंने आगे कहा उसकी पढ़ाई में माता-पिता की कोई सीधी भूमिका नहीं थी। उसे बहुत अच्छे शिक्षक और दोस्त मिले, जिनकी बदौलत वह आज इस मुकाम पर है।

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