MP Sharbati Gehu: मध्य प्रदेश का मशहूर शरबती गेहूं अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी खास पहचान बना चुका है। अपनी प्राकृतिक मिठास, सुनहरे दानों और बेहतरीन गुणवत्ता के कारण इसे 'गोल्डन ग्रेन' (Golden Grain) भी कहा जाता है। हाल ही में मिले जीआई (Geographical Indication) टैग और निर्यात के लिए शुरू किए गए नए एक्सपोर्ट कॉरिडोर के बाद इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। भारत सरकार की एपीडा (APEDA) और मध्य प्रदेश सरकार ने इस महीने शरबती गेहूं के सीधे निर्यात के लिए विशेष डायरेक्ट एक्सपोर्ट कॉरिडोर शुरू किया है। साथ ही नकली शरबती गेहूं की बिक्री रोकने के लिए अब हर बोरी पर GI आधारित QR कोड लगाना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
कहां है शरबती गेहूं की सबसे ज्यादा मांग?
शरबती गेहूं की सबसे ज्यादा मांग संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कतर, ओमान और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में है। यहां के लोग इसकी मुलायम और स्वादिष्ट रोटियों के लिए इसे पसंद करते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद खाड़ी देशों से आने वाले ऑर्डर में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश में शरबती गेहूं की खेती मुख्य रूप से सीहोर, विदिशा, अशोकनगर, नर्मदापुरम (होशंगाबाद) और हरदा जिलों में होती है। यहां की काली मिट्टी और खास जलवायु इस गेहूं को अलग स्वाद और सुनहरी चमक देती है।
32 हजार मीट्रिक टन शरबती गेहूं का निर्यात
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में मध्य प्रदेश से करीब 32 हजार मीट्रिक टन शरबती गेहूं का निर्यात हुआ था। वहीं, 2025-26 में यह बढ़कर 44 हजार मीट्रिक टन से अधिक हो गया। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी यूएई और सऊदी अरब की रही। विशेषज्ञों के मुताबिक, शरबती गेहूं में सामान्य गेहूं की तुलना में प्राकृतिक शर्करा की मात्रा अधिक होती है। यही वजह है कि इससे बनी रोटियां ज्यादा मुलायम, स्वादिष्ट और लंबे समय तक ताजा रहती हैं। इसके अलावा कम सिंचाई और कम कीटनाशकों के इस्तेमाल के कारण इसे स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर माना जाता है।
बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग से मध्य प्रदेश के किसानों को भी अच्छा लाभ मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग, बेहतर ब्रांडिंग और सीधे निर्यात की सुविधा मिलने से आने वाले समय में शरबती गेहूं का बाजार और मजबूत होगा तथा यह किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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