CBI charge sheet on Twisha Sharma Death Case: मध्य प्रदेश के भोपाल के ट्विशा शर्मा हत्याकांड में CBI ने अदालत के सामने 636 पन्नों की आरोपपत्र दाखिल की है, जिसमें उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया है। इस मामले में ट्विशा के चचेरे भाई आशीष शर्मा ने बताया कि आरोपपत्र में क्रूरता के आरोपों को साबित किया गया है, जबकि दस्तावेजों की जांच के बाद और अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा ‘यह साबित हो गया है कि बहुत क्रूरता की गई थी। अदालत ने सभी अधिकारियों को फिर से तलब किया है और सीबीआई भी वहां मौजूद रहेगी। इसके बाद, शाम 5:00 बजे और अधिक जानकारी सामने आएगी।‘ उन्होंने कहा कि आरोपपत्र और उसके दस्तावेजों को औपचारिक रूप से सौंपने की प्रक्रिया अभी जारी है और उसकी सामग्री की समीक्षा की जा रही है। आशीष ने आगे बताया ‘CBI की आरोपपत्र सौंपने की प्रक्रिया अभी जारी है; दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है। इसलिए, अभी यह कहना मुश्किल है कि इसमें सटीक विवरण क्या हैं।‘
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चार्जशीट में दहेज निषेध अधिनियम का जिक्र
ट्विशा के चचेरे भाई आगे कहा ‘दूसरे पोस्टमार्टम के संबंध में अभी तक कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है, न ही उपलब्ध कराए गए प्रारंभिक संक्षिप्त दस्तावेजों में इसका कोई उल्लेख है। संभव है कि यह मुख्य दस्तावेजों में मौजूद हो। फिलहाल इसमें छेड़छाड़, प्रभाव या पीएम2 का कोई जिक्र नहीं है।‘ उन्होंने बताया कि CBI ने गहन जांच के लिए अदालत से अनुमति मांगी है। उन्होंने कहा ‘उन्होंने अदालत से गहन जांच करने की अनुमति मांगी है। क्रूरता का जिक्र है; दहेज निषेध अधिनियम का जिक्र है। इसलिए, इन सभी मामलों में सीबीआई ने कुछ बातें तथ्यों के साथ प्रस्तुत की हैं, और कुछ मामलों में सीबीआई आगे की जांच की मांग कर रही है। इस बारे में शाम 5:00 बजे तक और स्पष्टता मिलेगी।‘
150 गवाहों से पूछताछ
जांच के बारे में उन्होंने बताया कि CBI ने लगभग 150 गवाहों से पूछताछ की है। उन्होंने कहा ‘CBI ने 150 गवाहों से बात की है; उसने कुछ बातों को निर्णायक रूप से साबित कर दिया है, लेकिन कुछ बातों का अभी तक जिक्र नहीं हुआ है।‘उन्होंने आगे कहा -2-3 दिनों की फोन कॉल लिस्ट, जिसमें उन उच्च पदस्थ अधिकारियों के नाम हैं जो मामले को दबाने की कोशिश कर रहे थे—इन सब बातों का शायद अभी तक जिक्र नहीं हुआ है। इस पर भी ध्यान देना जरूरी है; यह बहुत महत्वपूर्ण है।‘
मामले को गंभीर बताते हुए आशीष ने न्यायपालिका से अपील की कि आरोपी को आम नागरिक की तरह ही समझा जाए। उन्होंने कहा ‘देखिए, मामला इतना गंभीर है कि अदालत और न्यायिक प्रणाली को इसे उसी तरह से देखना चाहिए जैसे किसी आम नागरिक को देखा जाता है। जिस तरह से पहले यहां विशेष व्यवहार या प्रभाव का इस्तेमाल किया गया—उसे रोकना बेहद जरूरी है।‘आशीष ने आगे कहा ‘हम न्यायिक प्रणाली से उम्मीद करते हैं कि वे गिरिबाला सिंह को ऐसे कृत्य करने वाले किसी भी आम नागरिक की तरह ही समझें और उचित आदेश पारित करें।‘