India Gate protest: दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया, जिनमें दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज भी शामिल थे। ये कार्यकर्ता आज 04 अक्टूबर 2026 रविवार को इंडिया गेट की ओर मार्च कर रहे थे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर उनकी इस्तीफे की मांग कर रहे थे। बता दें, यह घटना विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच शुक्रवार को जंतर-मंतर पर ज्ञानेश कुमार की हिरासत के कुछ दिनों बाद हुई।
पुलिस बस के अंदर से भारद्वाज ने हिरासत के दौरान अधिकारियों पर उनके साथ बदसलूकी करने का आरोप लगाया। उन्होंने पत्रकारों से कहा 'वे मुझे फुटबॉल की तरह उठा रहे हैं और इधर-उधर फेंक रहे हैं...वे वहां शांति से खड़े हैं, फिर भी ये लोग उनके साथ इतना बुरा बर्ताव कर रहे हैं। ये लोग आम आदमी के बारे में क्या सोचते हैं? अगर वे नेताओं और पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं, तो सोचिए आम जनता के साथ कैसा व्यवहार करते होंगे। इस सरकार को जाना होगा, और मैं सभी से इंडिया गेट आने और अपनी आवाज उठाने का आग्रह करता हूं। वह चोर! वह चोर! वह चोर!' आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा 'यह बिल्कुल चौंकाने वाला है। मोदी जी ने तो हिटलर को भी पीछे छोड़ दिया है।'
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महिला पत्रकारों ने पुलिस पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप
इस बीच, आज रविवार को संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर भी विरोध प्रदर्शन हुए, जब एक महिला पत्रकार ने कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस कर्मियों पर छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने मामले में FIR दर्ज करने की मांग की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से न मिलने पर पुलिस से सवाल किया और कहा कि वे जवाब का इंतजार कर रहे हैं। दास ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा 'शिकायतकर्ता, पीड़िता, अपने वकीलों और हम सभी के साथ यहां मौजूद हैं। वे हमसे बात क्यों नहीं कर रहे हैं? हमने उन्हें दो-तीन मिनट का समय दिया है; अन्यथा, हम अंदर घुस जाएंगे।'
सौरभ दास ने कहा कि वह और रत्ना सिंह पीड़िता का समर्थन करने के लिए संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन आए थे और आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उसके साथ सहयोग नहीं कर रही है। उन्होंने कहा 'आज ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की ओर से रत्ना सिंह और मैं पीड़ित के समर्थन में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन आए हैं। जैसा कि आप जानते हैं, पूरा देश देख रहा है कि दिल्ली पुलिस किस क्रूरता से यहां प्रदर्शन कर रहे देश के युवाओं को हिरासत में ले रही है, उन पर हमला कर रही है और उनके साथ बदसलूकी कर रही है। दिल्ली पुलिस को अपने इस रवैये पर शर्म आनी चाहिए—खासकर 20 जुलाई को हुई क्रूरता के बाद; उनका यह बर्ताव वाकई शर्मनाक है।'