Delhi Police: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे है। इस बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज 04 अक्टूबर 2026 रविवार को भी प्रदर्शन हुए। लेकिन इस प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ गलत व्यवहार करने का मामला सामने आया है। दरअसल, तीन महिलाओं ने, जिन्होंने खुद को पत्रकार बताया है, एक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि SIR के विरोध में 03 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
इस मामले में पुलिस उपायुक्त (DCP) नेहा यादव ने कहा 'शाम करीब 6 बजे, तीन महिलाओं ने, जिन्होंने खुद को पत्रकार बताया, शिकायत दर्ज कराई कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया।' उन्होंने बताया कि उनकी शिकायत दर्ज कर ली गई है, चिकित्सा जांच कराई गई है और मामला अपराध शाखा को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा 'हम अनुरोध करते हैं कि जिनके पास भी संबंधित फुटेज हो, वे उसे अपराध शाखा के साथ साझा करें।'
DCP नेहा यादव ने आगे बताया कि प्रदर्शनकारियों को बीएनएसएस की धारा 163 का हवाला देते हुए स्थल खाली करने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कहा 'इलाके में BNSS की धारा 163 लागू होने के बावजूद, AISA और अन्य दलों ने 3 अक्टूबर को एसआईआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को बीएनएसएस की धारा 163 का हवाला देते हुए स्थल खाली करने की चेतावनी दी गई; उनके इनकार करने पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया।'
कैसे शुरू हुआ ये विवाद?
दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास हुए जन प्रदर्शन के संबंध में कम से कम तीन FIR दर्ज की हैं। दो FIR संसद स्ट्रीट (संसद मार्ग) पुलिस स्टेशन में और एक कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई। दरअसल, यह विवाद इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची, मतदाता पंजीकरण और आयोग की तकनीकी प्रणालियों से संबंधित निर्णयों पर 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि रिपोर्ट की गई आपत्तियां अंतिम निर्णयों पर संस्थागत असहमति के बराबर थीं। चुनाव आयोग ने कहा कि मसौदा तैयार करने के चरण में उठाए गए परिचालन संबंधी प्रश्न, सुझाव और इनपुट उसकी मानक प्रशासनिक और निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे। चुनाव आयोग ने कहा कि एसआईआर अभ्यास के कार्यक्रम से संबंधित निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।
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