Jantar Mantar Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन हो रहे है। बीते दिन रविवार को भी राष्ट्रीय राजधानी में हंगामा हुआ। इस दौरान दिल्ली पुलिस के लगभग 15 जवान घायल हो गए। जबकि स्थिति को काबू में करने के लिए लगभग 110 लोगों को हिरासत में लिया गया। इससे पहले, भारतीय युवा कांग्रेस (IVC) ने रविवार को रायसीना रोड से जंतर-मंतर की ओर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध मार्च निकाला, जिसमें केंद्र सरकार पर उन्हें संरक्षण देने का आरोप लगाया गया और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की गई। IVC के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में इस मार्च में सैकड़ों युवा कार्यकर्ता तख्तियां लिए हुए थे और सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। भारी पुलिस बल की तैनाती और रास्ते में बैरिकेडिंग के बावजूद मार्च जारी रहा।
बता दें, इलाके में BNSS की धारा 163 लागू होने के बावजूद, लोग प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। जिसके चलते पुलिस लगातार उन्हें रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई कर रही है। लेकिन प्रदर्शनकारियों के कदम रुकने का नाम ही नहीं ले रहे और वे बैरिकेड तोड़ते हुए जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति कल भी देखी गई और प्रदर्शन ने तनाव का रूप ले लिया। पुलिस ने एक्शन लेते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इस दौरान हंगामा बढ़ता गया, जिस वजह से कई पुलिस कर्मी घायल हुए। इसके बावजूद पुलिस ने हार नहीं मानी और कई लोगों को हिरासत में लिया।
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कैसे शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, यह विवाद इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची, मतदाता पंजीकरण और आयोग की तकनीकी प्रणालियों से संबंधित निर्णयों पर 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि रिपोर्ट की गई आपत्तियां अंतिम निर्णयों पर संस्थागत असहमति के बराबर थीं। चुनाव आयोग ने कहा कि मसौदा तैयार करने के चरण में उठाए गए परिचालन संबंधी प्रश्न, सुझाव और इनपुट उसकी मानक प्रशासनिक और निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे। चुनाव आयोग ने कहा कि एसआईआर अभ्यास के कार्यक्रम से संबंधित निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।