Modi Cabinet Decisions: सीमा साझा करने वाले देशों से FDI नियमों में दी ढील, चीन सहित सभी देशों के लिए मंजूरी आसान

Modi Cabinet Decisions: सीमा साझा करने वाले देशों से FDI नियमों में दी ढील, चीन सहित सभी देशों के लिए मंजूरी आसान

Modi Cabinet Decisions: मोदी कैबिनेट ने मंगलवार, 10 मार्च को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के नियमों में बड़ी ढील दी है। अब भारत के साथ जमीन की सीमा साझा करने वाले सभी देशों से आने वाले निवेश पर सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य नहीं होगी। इस बदलाव की जानकारी सूत्रों ने दी और बताया कि इसके लिए प्रेस नोट 3, 2020 में संशोधन किया गया है।

ये नियम हुए आसान

इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। पहले की व्यवस्था के तहत चीन, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे देशों के निवेशकों की कंपनियों को भारत में किसी भी सेक्टर में निवेश करने के लिए सरकार की मंजूरी लेनी जरूरी थी। अब इस नियम को आसान बना दिया गया है।

ये ऐप हुए बैन

चीन भारत में कुल FDI का केवल 0.32 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जो अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच $2.51 बिलियन के बराबर है। भारत और चीन के संबंध 2020 में गालवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद काफी तनावपूर्ण हो गए थे। उस समय भारत ने 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप्स जैसे TikTok, WeChat और Alibaba के UC ब्राउजर पर बैन लगा दिया था।

द्विपक्षीय व्यापार में बढ़ोतरी

हालांकि चीन से भारत को न्यूनतम FDI मिला है, लेकिन दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ा है। चीन अब भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत के चीन को निर्यात में 14.5 प्रतिशत की गिरावट आई और यह $14.25 बिलियन रह गया, जबकि 2023-24 में यह $16.66 बिलियन था। वहीं, आयात में 11.52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह $113.45 बिलियन तक पहुंच गया। इस कारण व्यापार घाटा $99.2 बिलियन तक बढ़ गया, जबकि 2023-24 में यह $85 बिलियन था।

अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक, भारत का चीन को निर्यात 38.37 प्रतिशत बढ़कर $15.88 बिलियन हो गया, जबकि आयात 13.82 प्रतिशत बढ़कर $108.18 बिलियन हुआ। इसी अवधि में व्यापार घाटा $92.3 बिलियन रहा।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ? 

विशेषज्ञों का कहना है कि FDI नियमों में यह बदलाव निवेशकों के लिए भारत को अधिक आकर्षक बनाएगा और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने में मदद करेगा, जबकि सीमा साझा करने वाले देशों के निवेश पर निगरानी अब भी बनी रहेगी। इस कदम से भारत और चीन सहित अन्य पड़ोसी देशों के निवेशकों के लिए निवेश प्रक्रिया सरल होगी और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में सुधार की उम्मीद है। 

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