
US-Iran Faceoff:अमेरिका-इजरायल और ईरान में बीते 11 दिनों से युद्ध जारी है। ईरान अपने ऊपर हुए हमलों के जवाब में खाड़ी देशों पर पलटवार कर रहा है। यह हमले मुख्य तौर से अमेरिकी एयरबेस या उससे जुड़े ठिकानों पर हो रहे हैं। हालांकि आशचर्य की बात ये है कि खुद पर हो रहे हमलों के बाद भी खाड़ी देश ईरान पर हमला करने से बच रहे हैं। अब यही बात अमेरिका को पच नहीं रही है।
अमेरिकी सीनेटर ने कहा कि अमेरिका लोग मारे जा रहे हैं औऱ अमेरिका उस आतंकवादी ईरानी शासन को हटाने के लिए अरबों डॉलर कर रहा है। लेकिन, सऊदी अरब सिर्फ जारी बयान करता है। वह ईरान में फैल रहे आतंक राज को खत्म करने के लिए सैन्य अभियानों में हिस्सा लेना नहीं चाहता है।
अरब देशों से जंग करने की अपील
लिंडसे ग्राहम ने आगे कहा कि उम्मीद है कि गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के देश इस मामले को और ज्यादा गंभीरता से लेंगे, क्योंकि ये लड़ाई उनके खिलाफ अपने ही घर में लड़ी जा रही है। अगर आप अपनी सेना अभी नहीं उतारेंगे, तो फिर कब उतारेंगे। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि स्थिति जल्द बदलेगी,अगर ऐसा नहीं हुआ, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
अरब देशों का क्या है रुख
अपने उपर हो रहे हमले के बाद भी अरब देशों ने ईरान पर कोई पलटवार नहीं किया है। सऊदी अरब ने हमलों की निंदा तो की लेकिन, सैन्य कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अरब देशों से माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि वह अरब देशों पर हमला करना नहीं चाहते और आगे तब तक नहीं करेंगे, जब तक उनके एयरस्पेस लोकेशन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होगा। दूसरी तरफ अमेरिका का हमला ईरान पर जारी है। अमेरिका अरब देशों में मौजूद अपने एयरबेस से हमला कर रहा है।
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