Uttrakhand News:सीमांत क्षेत्र में व्यवस्थाओं की पोल खोलते हुए कुलागाड़ का वैली ब्रिज एक बार फिर उफनते नाले की भेंट चढ़ गया। पुल के बहने से दारमा, व्यास और चौदास घाटी की आवाजाही दोबारा ठप हो गई है। भारत-चीन सीमा की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुआ है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 19 अगस्त को पुल बहने के बाद इसकी गंभीरता सामने आ चुकी थी, तो महज एक सप्ताह पहले बहाल किए गए पुल को आखिर कितनी मजबूती से तैयार किया गया था?
पहले भी तेज बहवा में टूटा ब्रिज
कुलागाड़ में 19 अगस्त को वैली ब्रिज बह गया था, जिसके बाद सीमांत क्षेत्र का संपर्क पूरी तरह कट गया था। लंबे इंतजार और मशक्कत के बाद 4 सितंबर को पुल पर दोबारा आवाजाही शुरू की गई। लोगों ने राहत की सांस ही ली थी कि करीब एक सप्ताह बाद शुक्रवार को कुलागाड़ नाला फिर उफान पर आ गया और वैली ब्रिज को अपने साथ बहा ले गया।
लोगों को हो रही काफी परेशानी
बार-बार पुल बहने से सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आवश्यक सामान, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को एक बार फिर संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील इस क्षेत्र में सड़क और पुल की बार-बार क्षति चिंता बढ़ाने वाली है।
निर्माण कार्य पर उठ रहे सवाल
एक ही मानसून में बार-बार पुल का बहना निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमांत क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए अस्थायी इंतजाम के बजाय स्थायी और मजबूत व्यवस्था की जरूरत है। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग कब तक वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर सीमांत क्षेत्र की आवाजाही बहाल करते हैं।
Also read: Uttarakhand News: हल्द्वानी कार्यकारिणी बैठक से लेकर रुद्रपुर सम्मेलन तक, CM धामी ने नितिन नवीन के दौरे पर जानें क्या कहा