Kerala Rain: केरल के दक्षिणी जिलों में बारिश ने जबरदस्त कहर मचाया गया। पिछल 24 घंटे में 361 mm तक की जबरदस्त बारिश के कारण कई जगहों पर ज़मीन खिसकने (लैंडस्लाइड) और मलबे के बहाव की घटनाएं हुई, जिनमें चार लोगों की मौत हो गई।
केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) के सदस्य सचिव शेखर लुकोस कुरियाकोस के अनुसार, इडुक्की और कोट्टायम जिलों में से हर एक में दो-दो लोगों की मौत की खबर है। जोरदार बारिश का यह दौर, जो मुख्य रूप से रात 10 बजे से सुबह के बीच हुआ, ढलान वाले इलाकों में घरों और सड़कों को काफी नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा, "असल में अच्छी बात यह है कि मरने वालों की संख्या बहुत कम है। इडुक्की में दो और कोट्टायम में दो लोगों की मौत की खबर है।
कुरियाकोस ने आगे कहा, "कोट्टायम, पथानामथिट्टा और इडुक्की में पिछले लगभग 24 घंटों में कुछ जगहों पर 361 mm तक ज़बरदस्त बारिश हुई। बारिश का ज़्यादातर दौर रात 10 बजे के बाद से सुबह तक चला। इसके कारण ढलान वाले इलाकों में, जहां सड़कें और घर वगैरह हैं, कई जगहों पर ज़मीन खिसकने की घटनाएं हुईं। हमने कुछ जगहों पर मलबे का बहाव भी देखा है। यह बस बादल फटने जैसी घटना थी, बस इतना ही। और कुछ नहीं, कोई बड़ी बात नहीं। अधिकारी ने मौसम की इस घटना को बस "बादल फटना" (क्लाउडबर्स्ट) बताया। उन्होंने कहा कि बारिश अभूतपूर्व थी, क्योंकि 12 घंटे से भी कम समय में हुई 361 मिमी बारिश को कोई भी नदी नहीं संभाल सकती--लेकिन लोगों में जागरूकता और पहले से मिली चेतावनियों की वजह से मरने वालों की संख्या कम रही।
मौसम की जानकारी देते हुए कुरियाकोस ने कहा, "दक्षिण में बारिश का दौर लगभग खत्म हो गया है। अब यह उत्तर की ओर बढ़ रहा है। बारिश शुरू हो गई है, इसलिए आज से लेकर कल तक त्रिशूर से कासरगोड तक अच्छी-खासी बारिश होगी। और उसके बाद, हमें इतनी भारी बारिश की स्थिति से राहत मिलेगी। बचाव कार्य के लिए, पथानामथिट्टा, इडुक्की और अलाप्पुझा समेत कई जिलों में NDRF की नौ टीमें पहले से तैनात कर दी गई हैं।
कुरियाकोस ने स्थानीय एजेंसियों और वॉलंटियर्स की भूमिका पर ज़ोर देते हुए बताया कि लगभग 10,000 'आपदा मित्र' वॉलंटियर्स और इतनी ही संख्या में सिविल डिफेंस के कर्मचारी फायर और रेस्क्यू सर्विस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "वे सभी फायर और रेस्क्यू सर्विस के साथ मिलकर और तालमेल बिठाकर काम करते हैं। भले ही कई बार फायर और रेस्क्यू सर्विस की ताकत को कम करके आंका जाता है, लेकिन असल में यही लोग सबसे ज़्यादा मेहनत करते हैं। यही वे लोग हैं जो केरल के हर हिस्से तक मदद पहुंचा रहे हैं। NDRF का काम असल में 'लास्ट माइल' यानी आखिरी छोर तक पहुंचना है, यानी तब मदद करना जब कुछ जगहों पर पहुँचना मुश्किल हो।"
लगातार हो रही बारिश को देखते हुए केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने स्वास्थ्य विभाग को आज अधिकारियों की एक आपातकालीन बैठक बुलाने का निर्देश दिया। सुबह 11 बजे होने वाली यह बैठक ऑनलाइन होगी और इसकी अध्यक्षता स्वास्थ्य विभाग की निदेशक मीनाक्षी करेंगी।
इस आपातकालीन बैठक में ज़िला चिकित्सा अधिकारी और NHM ज़िला कार्यक्रम प्रबंधक शामिल होंगे। इसका मकसद राहत शिविरों के कामकाज की समीक्षा करना और स्थानीय स्तर पर चिकित्सा व्यवस्थाओं पर चर्चा करना है। प्रभावित हर ज़िले की खास ज़रूरतों का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।